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दुष्कर्म पीड़िताओं को 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए कोर्ट की मंजूरी की आवश्यकता नहीं: हाई कोर्ट

इंदौर उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म पीड़िताओं को 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए न्यायालय की अनुमति की आवश्यकता से मुक्त कर दिया है। न्यायमूर्ति संदीप भट्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि गर्भावस्था 24 सप्ताह या उससे कम है, तो एमटीपी एक्ट की निर्धारित शर्तों के तहत डॉक्टर और अस्पताल कार्रवाई कर सकते हैं। यह आदेश एक नाबालिग पीड़िता की याचिका पर दिया गया, जिसके बाद स्वास्थ्य कमिश्नर को राज्य के सभी अस्पतालों में इसे लागू करने के निर्देश दिए गए। न्यायालय ने जबलपुर उच्च न्यायालय के 2025 के एक पूर्व फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए चिकित्सकों की राय पर्याप्त मानी गई थी।

ग्वालियर हाई कोर्ट ने सातवें वेतनमान पर राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज की

ग्वालियर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने पीएचई कर्मचारी गोपाल सिंह को सातवें वेतन आयोग का लाभ एक जनवरी 2016 से देने के पूर्व आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की एकलपीठ ने कहा कि आदेश में कोई प्रत्यक्ष त्रुटि नहीं है। सरकार ने आठ अगस्त 2022 के परिपत्र का हवाला देते हुए लाभ 15 दिसंबर 2016 से देने की दलील दी थी, जिसे अदालत ने समान मामलों में पूर्व निर्णयों के आधार पर निराधार माना।

हाई कोर्ट ने लीगल सर्विसेज कमेटी सचिव से व्यक्तिगत हलफनामे के साथ मांगा जवाब

उच्च न्यायालय ने निश्शुल्क विधिक सहायता के तहत अधिवक्ता नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने हाई कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी, जबलपुर की सचिव से दो दिन के भीतर व्यक्तिगत हलफनामे के साथ जवाब मांगा है। यह तथ्य रायसेन निवासी सुजीत धाकड़ की आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान सामने आया, जहां निजी अधिवक्ता के सक्रिय होने के बावजूद लीगल एड के तहत दूसरा वकालतनामा जारी किया गया था। कोर्ट ने अपीलकर्ता की पात्रता और आवेदन पर भी स्पष्टीकरण मांगा है।