मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के मामलों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, जहाँ एक वर्ष में 600 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी दर्ज की गई है। इन अपराधों की जांच के लिए साइबर पुलिस के पास केवल 300 कर्मी हैं, जिनमें आईटी एक्ट के तहत विवेचना के लिए केवल 19 निरीक्षक अधिकृत हैं। आरोपितों का अंतरराज्यीय नेटवर्क और पहचान छिपाने की प्रवृत्ति जांच को जटिल बनाती है। संसाधनों की कमी और अलग कैडर न होने के कारण जांच में देरी होती है, जबकि पिछले चार वर्षों में ठगी की राशि में 1100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।