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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अधिवक्ता से अभद्रता मामले में जबलपुर एसपी को कार्रवाई के निर्देश दिए

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रैफिक चेकिंग के दौरान एक अधिवक्ता के साथ कथित अभद्रता, गाली-गलौज और मारपीट के मामले में जबलपुर पुलिस अधीक्षक को कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि कानून का पालन कराने के लिए पुलिस की सख्ती जरूरी है, लेकिन नागरिकों के साथ व्यवहार में शालीनता की सीमा पार नहीं करनी चाहिए। यह मामला जबलपुर निवासी अधिवक्ता श्रेयांस दिवार से संबंधित है, जिनके साथ 11 जुलाई 2026 को विजय नगर थाना क्षेत्र में कथित तौर पर पुलिसकर्मियों द्वारा दुर्व्यवहार किया गया था।

एमपी हाईकोर्ट: असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती विवाद पर फैसला, सभी फाइनल रिजल्ट तलब

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एमपीपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया से जुड़े वर्षों पुराने विवादों पर फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की पीठ ने विभिन्न वर्षों की चयन प्रक्रियाओं के सभी अंतिम परिणामों को अदालत में तलब किया है। कोर्ट ने एमपीपीएससी को रजिस्ट्रार विकास शर्मा के समक्ष इन परिणामों को तुरंत प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए, हाईकोर्ट ने याचिकाओं को पांच श्रेणियों में बांटकर सुनवाई की रणनीति बनाई है, जिसमें जनभागीदारी अतिथि विद्वानों के विवाद और शैक्षणिक योग्यता से संबंधित मामले शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने 10 माह की बच्ची से मां को पुलिस सुरक्षा में प्रतिदिन 2 घंटे मिलने की अनुमति दी

एक महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने उसकी 10 माह की बच्ची को जबरन बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया है। जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने महिला को अगली सुनवाई तक प्रतिदिन दो घंटे बच्ची से मिलने की अनुमति दी। यह मुलाकात सागर महिला थाने में पदस्थ महिला आरक्षक की मौजूदगी में होगी। याचिकाकर्ता दमोह की नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता थी जिसने बच्ची को जन्म दिया था। बाल कल्याण समिति ने मां होने पर संदेह व्यक्त किया था, हालांकि महिला ने जन्म प्रमाण-पत्र व डिस्चार्ज टिकट प्रस्तुत किए थे।