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ग्वालियर हाई कोर्ट ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर मांगा जवाब, पूर्व सिटी प्लानर के आपराधिक ट्रायल की प्रति भी तलब

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने ग्वालियर में सड़कों की गुणवत्ता से जुड़ी जनहित याचिका पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने नगर निगम से पिछले पांच वर्षों में सड़क निर्माण पर खर्च की गई राशि का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। कोर्ट ने सिटी प्लानर सुरेश अहिरवार के गुमराह करने के प्रयास पर टिप्पणी की। न्यायालय ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए एक अधिवक्ता की अध्यक्षता में तकनीकी टीम सहित कमीशन गठित करने का भी संकेत दिया।

हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारी के जाति प्रमाण-पत्र जांच का 21 साल पुराना आदेश किया निरस्त

हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारी महेंद्र सिंह ठाकुर के जाति प्रमाण-पत्र की वैधता से संबंधित 21 साल पुराने एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने कहा कि जब कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुका है और विभागीय जांच में उसका प्रमाण-पत्र वैध पाया गया है, तो इतने लंबे अंतराल के बाद हाई पावर कमेटी से जांच कराने का कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं है। कोर्ट ने 2005 और 2008 के संबंधित आदेशों को रद्द कर दिया।

हाई कोर्ट ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में 27 साल से कार्यरत रामचरण की सेवा नियमित करने का निर्देश दिया

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में वर्ष 1989 से अस्थायी रूप से कार्यरत रामचरण की सेवाएं नियमित करने का निर्देश दिया है। रामचरण, जो रायसेन के निवासी हैं, करीब 27 वर्षों तक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में कार्यरत रहे लेकिन उन्हें नियमित दर्जा नहीं मिला था। जबलपुर मुख्यपीठ ने 24 अप्रैल 2026 को बैंक को रामचरण को पूर्व लाभों सहित नियमित सेवा में लेने का आदेश दिया था। बैंक ने इसके खिलाफ रिट अपील दायर की, जिसे न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने 23 जुलाई 2026 को निरस्त कर दिया।

संविदा महिला कर्मी को बाल देखभाल छुट्टी नहीं देने पर राज्य शिक्षा केंद्र निदेशक पर 50 हजार का जुर्माना

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने संविदा महिला कर्मचारी को बाल देखभाल छुट्टी (CCL) से वंचित करने पर राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह पर 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने छुट्टी का आवेदन खारिज करने वाले विभागीय आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा अवकाश नियम, 1977 के तहत संविदा महिला कर्मचारी भी दो बच्चों की देखभाल के लिए 240 दिन की छुट्टी की हकदार हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि विभागीय परिपत्र न्यायिक आदेशों से ऊपर नहीं हो सकते। याचिकाकर्ता आयशा शेख नौवीं बार कोर्ट पहुंची थीं।

विदिशा में स्टाप डैम पार कर स्कूल जाते बच्चों के मामले पर हाई कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

विदिशा जिले के ककरुआ और आसपास के गांवों के बच्चे बेतवा नदी पर बने स्टाप डैम के पिलरों से जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं। यह रास्ता लगभग चार फीट के अंतराल वाले नौ पिलरों से होकर गुजरता है, जो बारिश में और खतरनाक हो जाता है। हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और इसे बच्चों की सुरक्षा व शिक्षा के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय माना है। प्रशासन ने बैरिकेडिंग और चौकीदार तैनात किए हैं, जबकि शिक्षा विभाग ने एक माध्यमिक विद्यालय को हाई स्कूल में उन्नत करने का प्रस्ताव भेजा है। हाई कोर्ट अब सरकार से स्थायी समाधान पर जवाब मांगेगा।

भरण-पोषण तय करने से पहले पति-पत्नी की आय का पूर्ण आकलन अनिवार्य: MP हाई कोर्ट

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि भरण-पोषण मामलों में पति-पत्नी की वास्तविक आय, संपत्ति, खर्च और वित्तीय दायित्वों का पूर्ण आकलन किए बिना मेंटेनेंस तय नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति द्वारिकाधीश बंसल की एकलपीठ ने दमोह फैमिली कोर्ट के 15 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण के आदेश को निरस्त कर मामला पुनः सुनवाई के लिए वापस भेज दिया। कोर्ट ने प्रदेश की सभी फैमिली कोर्टों को निर्देश दिए कि भविष्य में प्रत्येक भरण-पोषण आदेश में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित किया जाए।