जबलपुर में साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर एक वृद्ध दंपती, प्रकाश पॉल शेजवाल (75) और उनकी पत्नी डोरा शेजवाल, से 22 लाख रुपये की ठगी की। ठगों ने दंपती को मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स केस में फंसाने का झांसा दिया और छह दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। इस दौरान, 21 लाख रुपये की एफडी तुड़वाकर आरटीजीएस के माध्यम से और 98,999 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए गए। पीड़ित ने सिविल लाइंस थाने में शिकायत दर्ज कराई है, और पुलिस आरोपितों की पहचान में जुटी है।
जबलपुर में सौ करोड़ रुपये से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार आरटीओ विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने ईडी की जांच पूरी होने, चालान पेश होने, आरोप तय होने और आरोपी के 16 माह से न्यायिक हिरासत में होने तथा सुनवाई में लगने वाले समय को आधार बनाया। इससे पूर्व हाईकोर्ट दो बार उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर चुका था। ईडी ने जमानत का विरोध करते हुए इसे गंभीर आर्थिक अपराध बताया था, लेकिन अदालत ने शर्तों के साथ जमानत मंजूर की।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंदौर नगर निगम के फर्जी बिल घोटाले में पीएमएलए कोर्ट में 20 हजार पेज की चार्जशीट दायर की है। घोटाले की राशि बढ़कर 103.42 करोड़ रुपए हो गई है, जिसमें 32 आरोपी शामिल हैं। ईडी ने 5 और 6 अगस्त 2024 को 20 ठिकानों पर छापे मारे, जिसमें 22.04 करोड़ रुपए की संपत्तियां फ्रीज की गईं और 37.14 करोड़ रुपए की 52 अचल संपत्तियां कुर्क की गईं। कुल 59.18 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। विशेष पीएमएलए कोर्ट ने आरोपियों को समन जारी कर अगली सुनवाई की तारीख तय की है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंदौर नगर निगम के दो साल पुराने फर्जी बिल घोटाले में 20,000 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में पेश की है। इसमें कुल 32 लोगों को आरोपित बनाया गया है, जिनमें निगम इंजीनियर अभय राठौर, ड्रेनेज कर्मचारी, ठेकेदार फर्मों के संचालक और स्थानीय निधि लेखा परीक्षा कार्यालय के अधिकारी शामिल हैं। आरोपितों पर धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय किए गए हैं। जांच में पता चला कि 103.42 करोड़ रुपये से अधिक की सार्वजनिक धनराशि फर्जी बिलों के माध्यम से गबन की गई। ईडी ने 59.18 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क, जब्त या फ्रीज की हैं और तीन मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार भी किया है।
प्रवर्तन निदेशालय के जालंधर जोनल कार्यालय ने मोहाली की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में अजय सहगल के खिलाफ एक प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है। उन पर फर्जी सहमति पत्रों के माध्यम से ‘चेंज ऑफ लैंड यूज’ (CLU) हासिल कर अपराध की कमाई को लॉन्डर करने का आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने पंजाब के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट को नकली सहमति पत्र देकर काम शुरू किया और पंजीकरण से पहले प्लॉट बेचे। इसके अतिरिक्त, ‘ला कैनेला फेज 2’ में रेरा की मंजूरी के बिना आवासीय इकाइयां भी बेची गईं।