उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के पारंपरिक विधि-विधान से भगवान महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के कपाट खुले और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पंचामृत अभिषेक, पूजन तथा दिव्य श्रृंगार किया गया। महा निर्वाणी अखाड़े द्वारा पवित्र भस्म अर्पित की गई। देशभर से आए श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और सुख, समृद्धि की कामना की।
उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर तक पहुंचने के लिए 10वां नया मार्ग तैयार किया जा रहा है। पुराने महाकाल थाना भवन को तोड़कर प्राचीन महाकाल द्वार से सटाकर बन रहा यह मार्ग हरसिद्धपाल-चौबीसखंभा माता मंदिर मार्ग को सीधे मंदिर से जोड़ेगा। यह मार्ग सामान्य दिनों में आवागमन और भीड़भाड़ वाले अवसरों पर एक्जिट के लिए उपयोग होगा। पिछले एक दशक में मंदिर तक पहुंचने वाले मार्गों की संख्या 5-6 से बढ़कर 10 हो गई है। पर्यटन विभाग के सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज होटल को भी इससे सीधा पहुंच मिलेगी।
इंदौर में हरसिद्धि माता मंदिर के समीप स्थित 125 वर्ष से अधिक प्राचीन महाकालेश्वर शिव मंदिर सावन में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। होल्कर काल में निर्मित इस मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व आज भी कायम है। होल्कर राजवंश ने इंदौर में कई शिव, गणेश और देवी मंदिरों का निर्माण कराया था। यह मंदिर 19वीं शताब्दी में होल्कर शासकों द्वारा बनवाया गया था, जिसमें संगमरमर नंदी और प्रस्तर शिवलिंग स्थापित है। वर्तमान में यह मंदिर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतर्गत संचालित होता है।