उज्जैन में भगवान श्री महाकालेश्वर की सोमवार को निकलने वाली राजसी सवारी के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सवारी मार्ग पर 2000 से अधिक पुलिस अधिकारी-कर्मचारी तैनात रहेंगे, जिसमें 100 से ज्यादा सादी वर्दी में और 100 महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं। इंदौर सहित आठ जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है। चोरी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का उपयोग किया जाएगा। यातायात प्रबंधन के तहत सुबह छह बजे से पुराने शहर के 16 प्रमुख मार्गों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा और श्रद्धालुओं के लिए छह पार्किंग स्थल तथा आठ वैकल्पिक निकासी मार्ग निर्धारित किए गए हैं।
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में सामान्य भक्तों को भी वीआईपी दर्शन की सुविधा मिल सकती है। मंदिर समिति प्रायोगिक तौर पर भीड़ कम रहने वाले समय में ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है। इससे भक्तों को लंबी कतार के बजाय छोटे मार्ग से सुगम दर्शन प्राप्त होंगे। इस पहल का उद्देश्य भक्तों को सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ स्लैक सीजन में श्रद्धालुओं का प्रवाह बढ़ाना और उज्जैन की स्थानीय अर्थव्यवस्था को वर्षभर गति देना है। योजना सफल होने पर इसे स्थायी किया जा सकता है।
अहमदाबाद की नेहा भट्ट ने 2021 में एक दर्दनाक हादसे में अपना एक पैर गंवा दिया था, लेकिन उन्होंने अपना हौसला नहीं खोया। कृत्रिम पैर के सहारे उन्होंने सात ज्योतिर्लिंगों के साथ-साथ बाबा बर्फानी अमरनाथ और केदारनाथ की कठिन यात्राएं पूरी कीं। नेहा ने 2025 में 22 किलोमीटर की केदारनाथ यात्रा और 2026 में 18 किलोमीटर की अमरनाथ यात्रा पैदल चलकर संपन्न की। बाबा महाकाल में उनकी अटूट आस्था है, जिसने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर परिसर में एक हजार वर्ष पुराना शिव मंदिर फिर से आकार ले रहा है। वर्ष 2020-21 में खोदाई के दौरान इसके अवशेष मिले थे, जिनमें आधार भाग, गर्भगृह, शिवलिंग और कई प्रतिमाएं शामिल हैं। पुरातत्व विभाग इन अवशेषों के आधार पर भूमिज शैली में मंदिर का पुनर्निर्माण कर रहा है, जिसकी ऊंचाई 36 से 37 फीट रहेगी और लागत 65 से 90 लाख रुपये अनुमानित है। यह महाकाल मंदिर के प्राचीन इतिहास को पुनर्स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
श्रावण माह की शुरुआत के साथ ही श्री महाकालेश्वर मंदिर में लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। मान्यता है कि श्रावण सोमवार व्रत से पाप नष्ट होते हैं और अक्षय पुण्य मिलता है। शाम 5 बजे जलाभिषेक बंद होने के बाद बाबा महाकाल राजा स्वरूप में दर्शन देते हैं। शाम 7 बजे संध्या आरती में दूध का भोग लगता है, जबकि रात 10:20 बजे शयन आरती में मेवे का प्रसाद चढ़ाया जाता है। मंदिर के पट इसके बाद बंद होते हैं। एक से एक लाख बिल्व पत्र चढ़ाने का विशेष धार्मिक महत्व है। माता सती और पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए श्रावण व्रत किए थे।
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से श्रावण मास में सोमवार को भगवान महाकाल की दूसरी सवारी निकाली गई। अवंतिकानाथ चंद्रमौलेश्वर और मनमहेश रूप में नगर भ्रमण पर निकले। इस बार बीमार श्यामू हाथी के स्थान पर मादा हाथी सुमा ने पहली बार सवारी में भाग लिया, जिससे 46 साल से चली आ रही रामू-श्यामू हाथी परिवार की सेवा समाप्त हो गई। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने पूजन कर सवारी को रवाना किया। सवारी परंपरागत मार्गों से शिप्रा तट पहुंची, जहां जलाभिषेक हुआ। 5 किलोमीटर लंबे सवारी मार्ग पर 4 घंटे तक भक्ति का उल्लास छाया रहा, जिसमें 15 से अधिक दल और 1200 जवान शामिल थे।
श्रावण कृष्ण पक्ष की हरियाली अमावस्या पर बुधवार सुबह उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में भस्म आरती के दौरान हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भक्तों ने देर रात से ही कतार में लगकर दर्शन किए। बाबा महाकाल को हरी भांग और हरे बेल पत्र की माला से श्रृंगारित किया गया, जिससे उनका अलौकिक स्वरूप नजर आया। श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती रात 3 बजे शुरू हुई, जिसमें भगवान का पंचामृत से जलाभिषेक किया गया। यह बदलाव आश्विन मास की पूर्णिमा तक जारी रहेगा।
उज्जैन में नागपंचमी के अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर के शीर्ष स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट 17 अगस्त, सोमवार को 24 घंटे के लिए खोले जाएंगे। इस वर्ष नागपंचमी और सावन का तीसरा सोमवार एक ही दिन पड़ने से एक दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के साथ बाबा महाकाल की दिव्य सवारी का पुण्य लाभ भी प्राप्त कर सकेंगे। लाखों श्रद्धालुओं की अपेक्षित भीड़ के लिए प्रशासन और मंदिर समिति ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं, जिनमें पार्किंग, प्रसाद वितरण, चिकित्सा सुविधाएँ और व्हीलचेयर सेवाएँ शामिल हैं।
उज्जैन के महाकाल मंदिर में भस्म आरती से जुड़ी कई अनूठी परंपराएं हैं। भगवान महाकाल के भोग के लिए एक दिन पहले भिक्षा मांगने की सदियों पुरानी परंपरा आज भी निभाई जाती है, जिसमें पुजारी परिवार द्वारा नियुक्त व्यक्ति शहर की 20 से अधिक दुकानों से सामग्री एकत्र करता है। भस्म आरती के लिए 16 अधिकृत पुजारी ही होते हैं। आरती से पूर्व मंदिर के पट आज्ञा लेकर खुलते हैं, 16 मंत्रों से अभिषेक होता है और नंदी के अभिषेक के बाद भगवान का भव्य शृंगार होता है। भस्म अर्पण के समय महिलाएं घूंघट रखती हैं। सावन में सोमवार को भगवान उपवास भी रखते हैं, और चढ़ाए गए फूलों से अगरबत्ती बनती है।
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के परंपरानुसार भस्म आरती संपन्न हुई। सुबह 4 बजे पट खुलने के बाद पंडे-पुजारियों ने देवी-देवताओं का पूजन किया। भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक कर उन्हें रजत ॐ, बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष की माला सहित आकर्षक श्रृंगार से सजाया गया। फल और मिष्ठान का भोग लगाने के बाद कपूर आरती हुई और महा निर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म अर्पित की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।