श्रावण मास के दूसरे सोमवार पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नगरी में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव के मंदिर को गर्भगृह से लेकर पूरे परिसर तक कई क्विंटल सुगंधित फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। यह विशेष पुष्प शृंगार पूरी रात चला, जिसमें महेश्वर और उज्जैन के पंडितों और दक्ष कारीगरों ने सहयोग दिया। सोमवार सुबह मंदिर के पट खुलने पर श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ के अलौकिक और मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर भावविभोर हो उठे।
श्रावण कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर शनिवार सुबह श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भस्म आरती संपन्न हुई। इस दौरान बाबा महाकाल का भांग और मखाने की माला से विशेष श्रृंगार किया गया, जिसमें उनके मस्तक पर शिवलिंग की सुंदर आकृति उकेरी गई। हजारों श्रद्धालुओं ने देर रात से ही पंक्तिबद्ध होकर दर्शन किए, जिससे मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा। सुबह 3 बजे बाबा महाकाल के पट खुलने के बाद जलाभिषेक, कपूर आरती और नवीन मुकुट धारण कराने जैसे अनुष्ठान संपन्न हुए। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई।
भोपाल में श्रावण-भादौ मास के दौरान बाबा मुक्तेश्वर की पांच सवारियां निकाली जाएंगी, जो उज्जैन के महाकाल की सवारियों के समान होंगी। श्रावण मास 30 जुलाई से शुरू होगा और पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा। इन पांच सवारियों में से चार श्रावण मास में तथा एक भादौ मास के सोमवार को निकलेगी। इस अवधि में प्रतिदिन मुक्तेश्वर महादेव की भस्म आरती भी की जाएगी। उज्जैन में महाकाल की 6 सवारियां निकलती हैं, जबकि भोपाल के मंदिरों में श्रावण की तैयारियां जोरों पर हैं।