इंदौर उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म पीड़िताओं को 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए न्यायालय की अनुमति की आवश्यकता से मुक्त कर दिया है। न्यायमूर्ति संदीप भट्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि गर्भावस्था 24 सप्ताह या उससे कम है, तो एमटीपी एक्ट की निर्धारित शर्तों के तहत डॉक्टर और अस्पताल कार्रवाई कर सकते हैं। यह आदेश एक नाबालिग पीड़िता की याचिका पर दिया गया, जिसके बाद स्वास्थ्य कमिश्नर को राज्य के सभी अस्पतालों में इसे लागू करने के निर्देश दिए गए। न्यायालय ने जबलपुर उच्च न्यायालय के 2025 के एक पूर्व फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए चिकित्सकों की राय पर्याप्त मानी गई थी।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने संविदा महिला कर्मचारी को बाल देखभाल छुट्टी (CCL) से वंचित करने पर राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह पर 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने छुट्टी का आवेदन खारिज करने वाले विभागीय आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा अवकाश नियम, 1977 के तहत संविदा महिला कर्मचारी भी दो बच्चों की देखभाल के लिए 240 दिन की छुट्टी की हकदार हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि विभागीय परिपत्र न्यायिक आदेशों से ऊपर नहीं हो सकते। याचिकाकर्ता आयशा शेख नौवीं बार कोर्ट पहुंची थीं।
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन अपनी उस टिप्पणी को लेकर आलोचना का सामना कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने माताओं को अपनी बहुओं को पारंपरिक खाना पकाना सिखाने की बात कही थी। सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें महिला विरोधी बताया है। पूर्व सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने कहा कि ये टिप्पणियाँ केरल के स्कूली पाठ्यक्रम में प्रचारित लैंगिक समानता के मूल्यों के विपरीत हैं। लेखिका एस. सरदाकुट्टी ने इन टिप्पणियों को पितृसत्तात्मक बताया और कहा कि ये पारंपरिक लैंगिक भूमिकाओं के प्रति बढ़ते प्रतिरोध को नजरअंदाज करती हैं, जिसका उदाहरण उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए हालिया महिला-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों से दिया।
मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश होने के बाद भाजपा ने इसे जनता तक पहुंचाने की रणनीति तेज कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विधायकों से यूसीसी के प्रावधानों और लाभों की सही जानकारी आमजन तक पहुंचाने को कहा। मुख्यमंत्री ने यूसीसी को प्रदेश की बड़ी उपलब्धि और सामाजिक समरसता, न्याय, महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं को विशेष लाभ मिलने और विपक्ष के भ्रम का तथ्यों से जवाब देने पर जोर दिया।
एक महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने उसकी 10 माह की बच्ची को जबरन बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया है। जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने महिला को अगली सुनवाई तक प्रतिदिन दो घंटे बच्ची से मिलने की अनुमति दी। यह मुलाकात सागर महिला थाने में पदस्थ महिला आरक्षक की मौजूदगी में होगी। याचिकाकर्ता दमोह की नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता थी जिसने बच्ची को जन्म दिया था। बाल कल्याण समिति ने मां होने पर संदेह व्यक्त किया था, हालांकि महिला ने जन्म प्रमाण-पत्र व डिस्चार्ज टिकट प्रस्तुत किए थे।