मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती विवाद का कारण बन गई है। सरकार कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण इसे हतोत्साहित कर रही है, जबकि किसान कम समय में अधिक लाभ के कारण इसका मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। गोदामों में पिछले सालों की साढ़े तीन लाख टन से अधिक मूंग कमजोर गुणवत्ता के कारण पड़ी हुई है। किसान उपार्जन में प्रति हेक्टेयर निर्धारित डेढ़ क्विंटल की मात्रा से असंतुष्ट हैं, जबकि उनका दावा 14-16 क्विंटल का है। इस असंतुष्टि के कारण 3.47 लाख पंजीकृत किसानों में से केवल 82 हजार ने ही उपज बेची। किसान नेता राकेश टिकैत राजगढ़ आएंगे।