भारत में दर्ज होने वाली हर चार मौतों में से तीन का कोई चिकित्सीय मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं बन पाता है, जिससे मौत की असली वजह का पुख्ता रिकॉर्ड दर्ज नहीं हो पाता। गोवा में सभी मौतों का प्रमाणन होता है, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में यह दर काफी कम है। जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत डॉक्टरों के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करना अनिवार्य है। प्रमाणित मौतों में हृदय संबंधी बीमारियां सबसे प्रमुख कारण हैं।