मेजर हमजा आरिफ को रविवार को इंदौर में राजकीय एवं सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। जैसलमेर (राजस्थान) में दुर्घटना में उनके निधन के बाद हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी। सैफी नगर मस्जिद परिसर में जनाजे की नमाज अदा की गई, जिसके बाद इमली बाजार स्थित दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान में सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर और अंतिम सलामी दी। सुपुर्दे खाक से पहले सम्मान का तिरंगा उनकी पत्नी ज्योति अरोड़ा को सौंपा गया। मेजर हमजा ने देश सेवा के लिए बड़ी कंपनियों के प्लेसमेंट को छोड़कर सेना में शामिल होने का विकल्प चुना था।
राजस्थान के जैसलमेर में गुरुवार रात हुई एक सड़क दुर्घटना में 31 वर्षीय मेजर हमजा आरिफ का निधन हो गया। वे नौ वर्षों से सेना में सेवारत थे और अपने साथी सैन्य कर्मियों के साथ ड्यूटी से लौटते समय उनका वाहन ऊंट से टकराकर पलट गया था। इंदौर के राजेंद्र नगर निवासी मेजर आरिफ की शादी एक माह पूर्व ही हुई थी। उनका पार्थिव शरीर शनिवार देर रात महू के मिलिट्री अस्पताल लाया गया। रविवार सुबह इंदौर के सैफी नगर में जनाजे की नमाज के बाद उन्हें राजकीय सम्मान के साथ इमली बाजार कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक किया जाएगा।