BREAKING NEWS

Latest News

सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल में रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या, गुजरात सरकार ने तत्काल जांच के आदेश दिए

सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल में एक रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या के बाद गुजरात सरकार ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि प्रशासन, सुपरिटेंडेंट, पुलिस और डीन की मौजूदगी में पैनल और फोरेंसिक पोस्टमार्टम कराया गया है, ताकि मौत के हर पहलू की बारीकी से जांच हो सके। एंटी-रैगिंग कमेटी, सुपरिटेंडेंट और डीन रातभर सिविल अस्पताल में मौजूद रहकर यह पता लगाएंगे कि डॉक्टर के साथ रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न या किसी तरह की प्रताड़ना तो नहीं हुई थी।

जबलपुर में नर्सिंग स्टाफ का दो घंटे का प्रदर्शन, लंबित मांगों पर विरोध

जबलपुर में मंगलवार को नर्सिंग स्टाफ अपनी लंबित मांगों के समर्थन में दो घंटे का शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेगा। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की 600 से अधिक नर्सिंग ऑफिसर मेडिकल एंड हेल्थ नर्सिंग एसोसिएशन, मध्य प्रदेश के बैनर तले डीन कार्यालय के सामने काली पट्टी बांधकर धरना देंगी और सांकेतिक कार्य बहिष्कार करेंगी। एसोसिएशन का कहना है कि शासन स्तर पर बार-बार पत्राचार के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। यदि एक माह के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो अगले महीने से अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। उनकी प्रमुख मांगों में रिक्त पदों पर नियुक्ति और सातवें वेतनमान का लाभ शामिल है।

मध्य प्रदेश में डॉक्टरों की भर्ती के लिए ‘यू कोट, वी पे’ योजना शुरू

मध्य प्रदेश में दूरस्थ क्षेत्रों के अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने ‘यू कोट, वी पे’ योजना शुरू की है। इस योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन में सबसे कम वेतन मांगने वाले रेडियोलॉजिस्ट, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ और शिशु रोग विशेषज्ञों को पदस्थ किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के लिए 14 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृति दी है, जिनमें से छह आदिवासी बहुल जिलों में बनाए जाएंगे। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

मध्य प्रदेश में डॉक्टरों की कमी दूर करने को ‘यू कोट, वी पे’ नीति

मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए ‘यू कोट, वी पे’ नीति लागू की है, जिसके तहत डॉक्टरों को उनकी मांग के अनुसार वेतन मिलेगा। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में सेवा देने वाले डॉक्टरों को पीजी दाखिले में प्राथमिकता और बोनस अंक दिए जाएंगे। सिजेरियन ऑपरेशन और जमीनी स्टाफ को भी प्रोत्साहन राशि मिलेगी। केंद्र सरकार ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन’ के तहत राज्यों को सहायता दे रही है और मध्य प्रदेश के लिए 14 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए हैं, जिनमें से 6 आदिवासी बहुल जिलों में होंगे, जिससे स्थानीय मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।

मध्य प्रदेश: एमबीबीएस ट्यूशन फीस में देश का पांचवां सबसे महंगा राज्य, इंटर्नशिप स्टाइपेंड में पिछड़ा

मध्य प्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सामने आए आंकड़ों के अनुसार, शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की ट्यूशन फीस के मामले में मध्य प्रदेश देश का पांचवां सबसे महंगा राज्य है, जहां छात्रों से सालाना 1 लाख रुपये फीस ली जाती है। इसके विपरीत, इंटर्नशिप के दौरान उन्हें मात्र 14,337 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। कई राज्यों में कम फीस होने के बावजूद इंटर्न्स को मध्य प्रदेश से अधिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। करीब 3,600 इंटर्न डॉक्टर न्यूनतम 30,000 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों का अकाल: ग्वालियर जीआरएमसी में 24% फैकल्टी पद रिक्त

मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है, जिससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में 353 स्वीकृत फैकल्टी पदों में से 83 रिक्त हैं, जो कुल 24% है और इसे प्रदेश में दूसरे स्थान पर रखता है। जबलपुर मेडिकल कॉलेज 26% रिक्त पदों के साथ पहले स्थान पर है। एमबीबीएस सीटें बढ़ने के बावजूद डॉक्टरों की कमी गंभीर चुनौती बनी हुई है, जिससे छात्रों की पढ़ाई और मरीजों का उपचार प्रभावित हो रहा है। प्रशासन लगातार रिक्त पदों को भरने का प्रयास कर रहा है।

मध्य प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में 8 साल बाद लौटेगा 30% मैनेजमेंट कोटा

मध्य प्रदेश सरकार निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। ‘प्रवेश नियम-2026’ के तहत 8 साल बाद 30% ‘मैनेजमेंट कोटा’ फिर से शुरू होगा, जिसे भविष्य में 35% तक बढ़ाया जा सकता है। 15% एनआरआई कोटा बरकरार रहेगा, जबकि शेष 55% सीटें सामान्य काउंसलिंग से भरी जाएंगी। इस नीति से सरकारी खजाने को प्रति वर्ष लगभग 1,000 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है, क्योंकि सरकार को मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे के छात्रों की फीस नहीं देनी होगी। हालांकि, इससे मेडिकल शिक्षा महंगी होने की आशंका है, क्योंकि मैनेजमेंट सीटों की फीस सामान्य सीटों से कई गुना अधिक होगी।