इंदौर में बुधवार को दिनभर बादल छाए रहे और हल्की वर्षा दर्ज की गई। रीगल क्षेत्र में 20.25 मिमी और एयरपोर्ट क्षेत्र में 18.7 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई। मौसम विज्ञानियों ने अगले तीन से चार दिनों तक इंदौर शहर और संभाग में रुक-रुककर हल्की वर्षा जारी रहने का अनुमान लगाया है। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र और दक्षिण मध्य प्रदेश में सक्रिय शियर जोन इस मौसम परिवर्तन के मुख्य कारण हैं।
जबलपुर के रानी अवंती बाई लोधी सागर परियोजना (बरगी बांध) का जलस्तर 25 जुलाई को 413.75 मीटर से बढ़कर रविवार को 417 मीटर तक पहुंच गया है, जो 3.25 मीटर की वृद्धि दर्शाता है। बांध का अधिकतम जलस्तर 422.76 मीटर है, जिससे यह पांच मीटर खाली है। मौसम विभाग ने जबलपुर सहित छह जिलों में अगले 24-48 घंटों के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है, और बारिश का सिलसिला 20 अगस्त तक जारी रहने की संभावना है। पिछले दो दिनों में अधिकतम तापमान में चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है।
मध्य प्रदेश में इस वर्ष मानसून की स्थिति औसत से 19 प्रतिशत कम वर्षा के साथ बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 20 प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इंदौर संभाग के अधिकांश जिले, बुरहानपुर, खरगोन और देवास को छोड़कर, औसत से कम वर्षा से प्रभावित हैं। इंदौर जिले में औसत से 10 प्रतिशत और इंदौर शहर में 133.2 मिमी कम बारिश हुई है। वर्तमान में उत्तर-पूर्व मध्य प्रदेश पर एक कम दबाव का क्षेत्र और अन्य मौसम प्रणालियाँ सक्रिय हैं, जिससे पूर्वी मध्य प्रदेश में अच्छी बारिश हो रही है।
मध्य प्रदेश में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन प्रभावित किया है। राजगढ़ जिले में नाले में कार बहने से उसमें सवार 11 लोगों में से 9 के शव बरामद किए गए हैं। राजधानी भोपाल में सोमवार रात चार साल बाद रिकॉर्ड 175.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिससे शहर के निचले इलाकों और प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया। मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला के अनुसार, यह इस सीजन की सबसे तेज बारिश थी। प्रदेश में दो मानसूनी सिस्टम सक्रिय हैं, जिससे 14 अगस्त तक हल्की से मध्यम वर्षा जारी रहने की संभावना है। विदिशा, सीहोर, रायसेन और गुना सहित अन्य जिलों में भी नदियां उफान पर हैं और जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
मध्य प्रदेश में पिछले दो दिनों से सक्रिय मानसून के कारण भारी बारिश हुई है, जिससे राजधानी भोपाल सहित कई जिलों में जलभराव और आवागमन प्रभावित हुआ है। भोपाल और आगर-मालवा में स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। मौसम विभाग ने नीमच सहित दस जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। जलाशयों का जलस्तर भी बढ़ा है, जिससे कई डैम के गेट खोलने पड़े हैं। हालांकि, प्रदेश में अब तक सामान्य से 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
ग्वालियर अंचल में 9 से 15 अगस्त के दौरान मानसूनी गतिविधियां जारी रहेंगी। मौसम विभाग ने इस अवधि में ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही के साथ मध्यम से तेज वर्षा और वज्रपात की संभावना जताई है। सप्ताह के शुरुआती दिनों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ेंगी, जबकि सप्ताहांत तक मौसम में हल्की नरमी आ सकती है। इस सप्ताह अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, साथ ही उच्च आर्द्रता के कारण उमस महसूस हो सकती है।
मध्यप्रदेश में इस वर्ष मानसून की बेरुखी जारी है, जहां अब तक औसत से 19 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। पूर्वी मध्यप्रदेश में 20 प्रतिशत और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इंदौर संभाग के अधिकांश जिलों में भी वर्षा की कमी का असर दिख रहा है, जबकि इंदौर शहर में औसत से 133.2 मिमी कम बारिश हुई है। अगले सप्ताह इंदौर संभाग में प्रभावी मानसून सिस्टम के अभाव में छिटपुट वर्षा की संभावना है, हालांकि उज्जैन और आलीराजपुर में अच्छी वर्षा के आसार हैं।
इंदौर में इस वर्ष सावन में छिटपुट वर्षा ही देखने को मिल रही है, और आगामी सप्ताह में भी केवल रुक-रुककर बूंदाबांदी का ही अनुमान है। भोपाल स्थित मौसम केंद्र के विज्ञानी एचएस पांडे के अनुसार, मानसून का कोई प्रभावी सिस्टम सक्रिय न होने के कारण वर्षा की गति धीमी है। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और मानसून द्रोणिका के ऊपरी हिस्से में होने से मध्य प्रदेश में वर्षा गतिविधियां कम हैं। आगामी दिनों में बनने वाला नया सिस्टम भी केवल उत्तरी और उत्तर-पूर्वी संभागों को प्रभावित करेगा। अलनीनो के प्रभाव से इस वर्ष कम वर्षा का अनुमान सही साबित हो रहा है।
मध्य प्रदेश में इस सीजन अब तक औसत से 18 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिससे 55 में से 43 जिले प्रभावित हुए हैं। प्रदेश में साढ़े तीन इंच कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, पिछले एक सप्ताह से राज्य में भारी बारिश नहीं हुई है। हालांकि, उत्तरी हिस्से में दो चक्रवाती परिसंचरण और एक नए पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से आगामी दिनों में तेज बारिश की उम्मीद है। बुधवार को पांच जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि कई अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।
मध्य प्रदेश में मानसून का मजबूत सिस्टम सक्रिय न होने के कारण वर्षा की रफ्तार धीमी पड़ गई है, सोमवार को अधिकांश हिस्सों में झमाझम वर्षा नहीं हुई। इंदौर और ग्वालियर में 3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि भोपाल में हल्की बौछारें पड़ीं। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी मध्य प्रदेश में अगले चार-पांच दिनों तक वर्षा गतिविधियां धीमी रहेंगी। हालांकि, पूर्वी हिस्सों में 6 अगस्त से मौसम बदलने और ग्वालियर, टीकमगढ़, निवाड़ी, छतरपुर में भारी वर्षा की संभावना है।