म्यूल खातों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपनाया है। अब वे ‘हैंडलर’ तैनात कर रहे हैं, जो तकनीकी रूप से दक्ष युवा और बीई-बीटेक इंजीनियर होते हैं। ये हैंडलर दूर-दराज के राज्यों से ठगी नेटवर्क और बैंक खाते संचालित करते हैं। हाल ही में 21.05 करोड़ रुपये की चार्टर्ड अकाउंटेंट से ठगी के मामले में हैंडलर अंकित वर्मा को गिरफ्तार किया गया। हैंडलर एपीके फाइल के जरिए ओटीपी प्राप्त कर स्क्रीन शेयरिंग से काम करते हैं और ठगी का पैसा तुरंत कई खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे पुलिस को उलझाना आसान हो जाता है। खाताधारक को केवल एटीएम से अपना कमीशन निकालना होता है।
हमीदिया अस्पताल की डॉक्टर से ऑनलाइन गेमिंग लिंक के जरिए हुई ठगी की जांच में भोपाल से संचालित एक बड़े म्यूल बैंक खाता नेटवर्क का खुलासा हुआ है। यह गिरोह ग्रामीणों के सैकड़ों बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगों को किराए पर देता था, जिसके जरिए देशभर में ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती थी। प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर छह प्रतिशत कमीशन वसूला जाता था। पुलिस ने इस मामले में करतार सिंह, महेश बिश्नोई और विकास पुनिया को गिरफ्तार किया है और आगे की जांच जारी है।