मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने लापता युवक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को आवश्यक जानकारी जानबूझकर छिपाना आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आ सकता है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की पीठ ने यह टिप्पणी 11 अगस्त 2026 को राधा प्रजापति की याचिका पर की। राज्य सरकार ने बताया कि प्रतिवादी, युवक का दादा, सहयोग नहीं कर रहा है, जबकि प्रतिवादी ने तथ्यों को छिपाने और वैवाहिक विवाद का दावा किया। पुलिस ने युवक को तीन दिन में बरामद कर कोर्ट में पेश करने की उम्मीद जताई है। अगली सुनवाई 14 अगस्त 2026 को होगी।
इंदौर-देवास बायपास की बदहाली पर मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने गड्ढों के फोटोग्राफ पेश किए, जिस पर कोर्ट ने उन्हें ‘जानलेवा’ और ‘खतरनाक’ बताया। कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से 2023 से अब तक की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मौखिक रूप से सात दिन में स्थिति सुधारने के निर्देश दिए। मातृ फाउंडेशन ने यह जनहित याचिका दायर की है। NHAI ने ठेकेदार हटाने की बात कही, लेकिन याचिकाकर्ता ने 18 फीट चौड़े गड्ढे की तस्वीरें पेश कीं।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि केवल अवैध हिरासत की आशंका व्यक्त करने से याचिका स्वीकार्य नहीं होती; याचिकाकर्ता को प्रथमदृष्टया यह दिखाना होगा कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में किसी की अवैध हिरासत में है। रिंकू राजपूत द्वारा दायर इस याचिका में पत्नी के लापता होने और पुलिस की निष्क्रियता का आरोप था, लेकिन कोर्ट ने पाया कि अवैध हिरासत का कोई प्रमाण या तथ्य पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने त्वरित जांच के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत वैकल्पिक कानूनी उपाय भी सुझाए।
कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन की राज्यसभा नामांकन निरस्तीकरण को चुनौती देती याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की एकलपीठ ने तीन निर्वाचित राज्यसभा सदस्यों, राज्य व भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त, निर्वाचन अधिकारी और मप्र विधानसभा के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी। नटराजन ने दावा किया कि उनका नामांकन नियमों के विपरीत और जल्दबाजी में निरस्त किया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला या आरोप लंबित नहीं था, उन्हें केवल एक व्यक्तिगत परिवाद में औपचारिक रूप से प्रतिवादी बनाया गया था।
मध्य प्रदेश शासन के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ चुनावी हलफनामे में संपत्ति छिपाने के आरोप में दायर याचिका पर जबलपुर हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। कांग्रेस नेता राजकुमार धनोरा द्वारा दायर इस याचिका में आरोप है कि राजपूत ने चुनाव के दौरान करोड़ों की संपत्ति की जानकारी छिपाई थी, जिसके आधार पर चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन को चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। पूर्व में भी इसी तरह के आरोपों पर कांग्रेस प्रत्याशी नीरज शर्मा की याचिका खारिज हो चुकी है, जिसका प्रभाव मौजूदा याचिका पर पड़ने की संभावना है।
जबलपुर की छात्रा अंशिका सिंह ने नीट परिणाम में 296 अंकों के कथित अंतर को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उनका दावा है कि आंसर-की के आधार पर उनके 441 अंक बन रहे थे, जबकि आधिकारिक परिणाम में केवल 145 अंक दर्ज किए गए। छात्रा ने मूल्यांकन प्रक्रिया की जांच और परिणाम में कथित विसंगति को दूर करने की मांग की है। मामले की सुनवाई प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ के समक्ष प्रस्तावित है, जिसमें अधिवक्ता दुर्गेश सिंगरोरे याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
इंदौर अभिभाषक संघ चुनाव को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिस पर कोर्ट ने राज्य अधिवक्ता परिषद, इंदौर अभिभाषक संघ और निर्वाचन मंडल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कार्यकारिणी पद के प्रत्याशी दिनेश मैहर ने याचिका दायर कर मतगणना में धांधली का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, 3558 मतों में से 86 निरस्त होने के बाद, प्रत्येक मतदाता के छह सदस्यों को वोट देने के नियम से 20832 मत होने चाहिए थे, लेकिन प्रत्याशियों को 21155 मत प्राप्त हुए, जो 323 अधिक हैं। शिकायत के बावजूद निर्वाचन अधिकारी और राज्य अधिवक्ता परिषद ने कार्रवाई नहीं की।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मैहर में मां शारदा मंदिर मार्ग पर प्रस्तावित सड़क निर्माण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि सड़क निर्माण तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट और आवश्यक तकनीकी आकलन पर आधारित होता है, और ऐसे तकनीकी निर्णयों में अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती। इसके अतिरिक्त, हाई कोर्ट ने 40 बस रूटों की नई परिवहन योजना पर सरकार को फटकार लगाते हुए नोटिफिकेशन पर अंतरिम रोक लगाई और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की 40 अंतरराज्यीय बस रूटों की ‘विशेष परिवहन योजना’ पर बड़ा झटका दिया है। न्यायालय ने 7 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। निजी बस ऑपरेटर धर्मेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने अपनी व्यवसायिक अधिकारों के हनन और योजना में हितों के टकराव तथा कंपनी को एसटीयू का दर्जा न मिलने जैसे गंभीर सवाल उठाए हैं। सरकार के जवाब के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।
ग्वालियर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपने अधिकारों के प्रति दशकों तक उदासीन रहने वाले व्यक्ति को राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने भोलाराम किरार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि पुराने विवादों को दोबारा खोलने से न्यायिक निर्णयों की अंतिमता प्रभावित होगी। याचिकाकर्ता ने वर्ष 1999 के एक आदेश को 23 साल बाद चुनौती दी थी, और फिर हाईकोर्ट आने में भी तीन साल की देरी की। कोर्ट ने अनुच्छेद-226 के तहत राहत मांगने के लिए समयबद्धता और सतर्कता को आवश्यक बताया।