ग्वालियर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपने अधिकारों के प्रति दशकों तक उदासीन रहने वाले व्यक्ति को राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने भोलाराम किरार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि पुराने विवादों को दोबारा खोलने से न्यायिक निर्णयों की अंतिमता प्रभावित होगी। याचिकाकर्ता ने वर्ष 1999 के एक आदेश को 23 साल बाद चुनौती दी थी, और फिर हाईकोर्ट आने में भी तीन साल की देरी की। कोर्ट ने अनुच्छेद-226 के तहत राहत मांगने के लिए समयबद्धता और सतर्कता को आवश्यक बताया।
हाई कोर्ट में विधायक गोविंद सिंह राजपूत के वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव हलफनामे को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में उन पर करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्तियां छिपाने का आरोप है। सागर जिले के रहली विधानसभा क्षेत्र निवासी राजकुमार सिंह ने यह याचिका दायर की है, जिसमें राजपूत, उनकी पत्नी और एक समिति के नाम पर दर्ज अचल संपत्तियों का पूरा विवरण चुनाव आयोग को न देने का दावा किया गया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को तय की है।