भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने के आसपास दूषित पेयजल आपूर्ति का मामला गहरा गया है। गैस पीड़ित संगठनों की रिपोर्ट में पानी में ‘फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया’ पाए जाने के बाद नगर निगम ने भले ही शुद्ध पेयजल का दावा किया हो, लेकिन ‘नवदुनिया’ टीम के ब्लूमून कॉलोनी के निरीक्षण में सच्चाई सामने आई। पेयजल पाइपलाइनें गंदगी और नालियों के बीच दबी मिलीं। स्थानीय निवासियों ने गंदे पानी से बीमारी, चूहे निकलने और मरम्मत न होने की शिकायत की है। एक बच्चे को टाइफाइड होने की बात भी सामने आई है।
भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े मामले में जबलपुर हाई कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड संयंत्र के आसपास भूजल के दूषित होने के आरोपों को गंभीरता से लिया है। न्यायालय ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPPCB) को विशेषज्ञ समिति गठित कर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से भूजल के नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराने और 13 अगस्त तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह आदेश वर्ष 2004 से लंबित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें हस्तक्षेपकर्ताओं ने स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर खतरे की शिकायतें उठाई थीं। मामले की अगली सुनवाई तीन सितंबर को होगी।