इंदौर नगर निगम शहर के 300 उपेक्षित उद्यानों के कायाकल्प की विस्तृत योजना पर कार्य कर रहा है। निगम के 1400 से अधिक बगीचों में से ये उद्यान देखरेख और पानी की कमी के कारण बदहाल थे, जिससे पौधारोपण भी रुका हुआ था। लगभग 1100 बगीचे पहले ही संवारे जा चुके हैं। अब शेष 300 उद्यानों में बाउंड्रीवॉल, खेल उपकरण, पाथवे, बेंच और पानी की आपूर्ति के लिए बोरिंग जैसे कार्य किए जाएंगे। प्रथम चरण में हवा बंगला, विजयनगर, बिलावली और राजेंद्रनगर जोन के 15 बगीचों का कायाकल्प शुरू हो गया है।
मध्य प्रदेश सरकार लाड़ली बहना योजना के तीन वर्ष पूरे होने के बाद इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का व्यापक अध्ययन कराएगी। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान (एआईजीजीपीए) को लगभग 1.25 करोड़ महिलाओं तक पहुंची इस योजना के आकलन का जिम्मा सौंपा गया है। यह अध्ययन महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, घरेलू निर्णयों में भागीदारी और परिवार की जरूरतें पूरी करने की क्षमता में हुए बदलाव का आकलन करेगा। इसमें खर्च के तरीके, आर्थिक स्थिति में सुधार, स्वरोजगार के अवसर और वंचित पात्र महिलाओं की संख्या का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
मध्य प्रदेश सरकार लाड़ली बहना योजना के वास्तविक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का गहन अध्ययन कराएगी। योजना के दो वर्ष पूरे होने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान यह पड़ताल करेगा कि मासिक आर्थिक सहायता ने महिलाओं के जीवन में कितना बदलाव लाया है। अध्ययन में राशि के उपयोग, आर्थिक स्थिति में सुधार, बच्चों की शिक्षा व स्वास्थ्य पर प्रभाव, स्वरोजगार के अवसर और घरेलू वित्तीय निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी का मूल्यांकन किया जाएगा। यह अध्ययन भविष्य में योजना में सुधार का आधार बनेगा, जैसा कि महाराष्ट्र और ओडिशा के समान अध्ययनों में सकारात्मक परिणाम देखे गए हैं।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की पहल पर इंसान और हाथियों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के लिए एक राज्यवार मास्टर प्लान तैयार किया गया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून द्वारा दो साल के अध्ययन के बाद तैयार की गई यह रिपोर्ट 20-25 वर्षों के आंकड़ों पर आधारित है। इसका मुख्य लक्ष्य प्रतिवर्ष होने वाली लगभग 600 मानवीय और 120 हाथी मौतों को लगभग शून्य तक लाना है। झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल को सर्वाधिक संवेदनशील राज्य चिह्नित किया गया है, जहाँ 100 हॉटस्पॉट हैं। यह योजना टकराव के बाद मुआवजा देने के बजाय पहले से रोकथाम पर केंद्रित है।
उच्च शिक्षा विभाग ने सत्र 2024-25 के लिए गांव की बेटी और प्रतिभा किरण छात्रवृत्ति योजना के तहत आवेदन की अंतिम तिथि 1 अगस्त तक बढ़ा दी है। पहले यह तिथि 20 जुलाई निर्धारित थी। विभाग ने यह निर्णय उन छात्राओं को राहत देने के लिए लिया है जो निर्धारित समय में आवेदन नहीं कर पाई थीं, ताकि अधिक पात्र छात्राओं को योजना का लाभ मिल सके। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को समय पर सत्यापन और भुगतान के निर्देश दिए हैं, साथ ही छात्राओं से जल्द आवेदन करने की अपील की है। योजना के तहत छात्राओं को सालाना ₹5,000 मिलते हैं।