एम्स भोपाल और डीआरडीओ की प्रमुख प्रयोगशाला डीआईपीएएस ने देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों को कठिन परिस्थितियों में अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने के लिए हाथ मिलाया है। यह समझौता स्वदेशी तकनीकों और चिकित्सा समाधानों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे सियाचिन, लद्दाख, ऊंचे पहाड़ों और युद्ध क्षेत्र में तैनात जवानों को सीधा लाभ मिलेगा। शोध में सैनिकों पर अत्यधिक ठंड, कम ऑक्सीजन और तनाव के प्रभावों का अध्ययन कर ऐसे उपाय विकसित किए जाएंगे, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़े। परियोजना में पहनने योग्य स्मार्ट उपकरण भी बनाए जाएंगे। यह पहल विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करेगी और इसके लाभ आम मरीजों को भी मिलेंगे।