ग्वालियर जिला न्यायालय में सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े विवाद पर अहम सुनवाई हुई। यह सुनवाई दिवंगत पद्माराजे सिंधिया की बेटी प्रतिमा देवी द्वारा दायर कैविएट पर केंद्रित थी। कैविएट को निरस्त करने की मांग पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। लगभग 1000 पन्नों का रिकॉर्ड पेश होने के बाद, न्यायालय ने विस्तृत अध्ययन के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता बताते हुए अगली सुनवाई 10 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित कर दी। प्रतिमा देवी ने आपसी समझौते से होने वाले निपटारे में अपनी शाखा के वैधानिक अधिकारों पर विचार करने की मांग की है।
सिंधिया राजघराने के 40 हजार करोड़ रुपये के संपत्ति विवाद में 78 साल पुराना ‘द कोवेनेंट’ दस्तावेज अहम कड़ी बन गया है। यह दस्तावेज 1948 में भारत सरकार और तत्कालीन मध्य भारत सरकार के बीच हुआ था, जिसमें निजी और सरकारी संपत्तियों का बंटवारा किया गया था। इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को है। हाल ही में, ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ पद्माराजे सिंधिया की बेटी प्रतिमा देवी ने अदालत में कैविएट दाखिल कर प्रस्तावित समझौते में अपने वैधानिक अधिकारों के प्रभावित होने की बात कही है।
ग्वालियर के सिंधिया परिवार की अरबों रुपये की विरासत के बंटवारे पर महा-समझौते की सुनवाई ग्वालियर जिला न्यायालय में 27 जुलाई तक टल गई है। सोमवार को अंतिम सहमति की उम्मीद थी, लेकिन बुआओं के दावों से जुड़े आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण सुनवाई आगे बढ़ा दी गई। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव का उद्देश्य आपसी सहमति से संपत्ति विवाद को समाप्त करना है, जिसमें परिवार के कई सदस्य शामिल हैं। यदि समझौता मंजूर होता है, तो कई लंबित मुकदमे समाप्त हो जाएंगे।