भोपाल के जिला अस्पताल जेपी में मंगलवार शाम हुई वर्षा के कारण व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। अस्पताल के कई हिस्सों जैसे आईसीयू, इमरजेंसी वार्ड, महिला वार्ड, सोनोग्राफी सेंटर और सीढ़ियों पर छत से पानी टपकता मिला। मरीजों के बैठने की जगहों पर, दस्तावेजों और फर्नीचर पर पानी जमा हो गया, जिससे फिसलन और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया। सोनोग्राफी पंजीयन केंद्र के दस्तावेज भी भीग गए। मरीजों और उनके परिजनों को पानी के बीच से आवाजाही करनी पड़ी, जिससे उन्हें असुविधा हुई।
मध्य प्रदेश में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को अपनाने की रफ्तार धीमी बनी हुई है, हाल ही में हुए एलपीजी संकट के बावजूद। पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड के 31 मई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में केवल 3,36,953 घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं, जिससे यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 8वें स्थान पर है। इंदौर और उज्जैन में सर्वाधिक 1,35,095 कनेक्शन हैं, जबकि राजधानी भोपाल में मात्र 39,432 कनेक्शन हैं। महाराष्ट्र जैसे राज्य 47.42 लाख कनेक्शनों के साथ शीर्ष पर हैं, जो मध्य प्रदेश से काफी आगे हैं।