भोपाल का राजस्व विभाग नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे जैसे मामलों के निराकरण में प्रदेश के सबसे खराब पांच जिलों में शामिल है। सीमांकन में राजधानी पूरे राज्य में सबसे निचले पायदान पर है, जिससे सैकड़ों मामले महीनों से लंबित हैं। तहसीलदार की गैरमौजूदगी और रिकॉर्ड में गड़बड़ी प्रमुख कारण हैं। सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों में भी राजस्व विभाग 30,403 लंबित मामलों के साथ पहले नंबर पर है। भोपाल कलेक्टर प्रियांक मिश्रा ने लंबित मामलों में कमी आने और आगे भी सुधार का आश्वासन दिया है।
मध्य प्रदेश राजस्व निरीक्षक संघ, जिला भोपाल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा को पत्र लिखकर नायब तहसीलदार के रिक्त पदों पर राजस्व निरीक्षकों को पदोन्नति देने की मांग की है। संघ का कहना है कि इस अवसर से राजस्व निरीक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और प्रशासन पर वित्तीय भार भी कम होगा। पत्र में बताया गया है कि नायब तहसीलदार के स्वीकृत पदों में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, जबकि राजस्व निरीक्षक संवर्ग में पर्याप्त कर्मचारी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
भोपाल में मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान-2026 के तहत लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी है। पंचशील नगर में शुक्रवार को आयोजित विशेष शिविर में जनता की लंबित शिकायतों का शत-प्रतिशत निराकरण किया जाएगा। जिला प्रशासन ने सभी विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वर्षों से लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता पर हल किया जाए। शिविर में सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई और लोक सेवा गारंटी अधिनियम के मामलों के साथ-साथ राजस्व, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी विभिन्न विभागों की सेवाओं की भी समीक्षा की जाएगी, जिसमें नामांतरण और आयुष्मान कार्ड जैसे विषय शामिल हैं।
टीकमगढ़ के अमर शहीद नारायणदास खरे की शहीद स्थली और मेला ग्राउंड की भूमि पर विवाद सामने आया है। राजस्व विभाग के सीमांकन में शहीद स्थल की बाउंड्रीवाल और सामुदायिक भवन का हिस्सा निजी भूमि पर अतिक्रमण पाया गया है। यह भूमि वर्तमान में दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के पुत्र अभिषेक यादव के नाम दर्ज है। कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला ने कथित फर्जी बेचनामे का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है और आंदोलन की चेतावनी दी है। तहसीलदार ने रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई की बात कही है, जबकि कलेक्टर यादव ने इसे अपनी पैतृक संपत्ति बताया है और सरकारी भूमि देने का सुझाव दिया है।
ग्वालियर में नायब तहसीलदार सतेन्द्र तोमर को शासकीय भूमि के नामांतरण में अनियमितता बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। संभागीय आयुक्त मनोज खत्री ने यह कार्रवाई कलेक्टर रुचिका चौहान के प्रतिवेदन के आधार पर की। तोमर पर बिना परीक्षण किए शासकीय भूमि सर्वे क्रं 296/2 का नामांतरण आदेश पारित करने और फिर सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना उसे निरस्त करने का आरोप है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय ग्वालियर कलेक्टर कार्यालय रहेगा और उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
मध्यप्रदेश में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि पटवारियों के विरुद्ध सीधी एफआईआर दर्ज न की जाए। एफआईआर से पहले पूरे मामले का प्रारंभिक परीक्षण अनिवार्य होगा। यह निर्णय पटवारी संघ के ज्ञापन और उनकी मांग पर लिया गया है, जिसमें वसीयत व अन्य राजस्व न्यायालयीन प्रकरणों में पटवारियों के प्रतिवेदन के आधार पर सीधे एफआईआर दर्ज होने की शिकायत की गई थी। हालांकि, इस आदेश के बावजूद 23 हजार पटवारी अपनी हड़ताल से वापस नहीं लौटे हैं, जो 3 अगस्त से जारी है।
मध्य प्रदेश में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार ने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि पटवारियों के विरुद्ध सीधे एफआईआर दर्ज न की जाए। किसी भी पटवारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने से पहले पूरे मामले का प्रारंभिक परीक्षण किया जाना चाहिए। मप्र पटवारी संघ द्वारा 20 जुलाई को सौंपे गए ज्ञापन में पटवारियों पर सीधे एफआईआर दर्ज करने का मुद्दा उठाया गया था। सोमवार को पटवारियों के प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख सचिव से मुलाकात के बाद सरकार ने प्रारंभिक जांच के बिना एफआईआर दर्ज न करने की इस प्रमुख मांग को स्वीकार कर लिया है।
भोपाल जिले के 731 गांवों के वर्ष 1954 से अब तक के 72 साल पुराने जमीन रिकॉर्ड अगले तीन महीने में ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। खसरा, खतौनी और नामांतरण जैसे दस्तावेज भू-अभिलेख पोर्टल पर देखे और डाउनलोड किए जा सकेंगे। यह पहल पुराने राजस्व अभिलेखों के खराब होने और उन्हें प्राप्त करने में लगने वाले लंबे समय की समस्या का समाधान करेगी। जुलाई से शुरू हुए डिजिटलीकरण अभियान के तीसरे चरण में आठ लाख पेज स्कैन किए जाएंगे, जिसके बाद पटवारियों द्वारा ऑनलाइन सत्यापन होगा। यह प्रक्रिया नागरिकों और राजस्व अधिकारियों दोनों के लिए दस्तावेजों तक पहुंच को तेज और पारदर्शी बनाएगी।
हाई कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि विवादित वसीयत के आधार पर राजस्व अधिकारी भूमि का नामांतरण नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने बैतूल के एक मामले में यह आदेश दिया, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने 1989 की कथित वसीयत पर नामांतरण का दावा किया था। प्रतिवादियों ने वसीयत को फर्जी बताते हुए चुनौती दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वसीयत की वैधता पर विवाद होने पर पक्षकारों को अपने अधिकारों की घोषणा के लिए सिविल कोर्ट जाना होगा, क्योंकि राजस्व अधिकारियों को ऐसे मामलों में फैसला करने का अधिकार नहीं है। बोर्ड आफ रेवेन्यू द्वारा पूर्व में पारित नामांतरण आदेशों को निरस्त करना उचित था।
भोपाल शहर और 731 गांवों के लाखों भू-स्वामियों को बड़ी राहत मिलने वाली है, क्योंकि वर्ष 1954 से अब तक के खसरे, खतौनी और नामांतरण के भू-अभिलेख अगले तीन महीनों में ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे लोगों को प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जिला प्रशासन ने डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें स्कैनिंग, मेटाडेटा तैयार करना और पटवारी द्वारा ऑनलाइन सत्यापन शामिल है। सभी रिकॉर्ड भूलेख पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।