इंदौर में आयोजित जनकल्याण शिविरों में राजस्व विभाग की सेवाओं के लिए 1.11 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। खसरा-खतौनी, चालू नक्शे, नामांतरण और सीमांकन जैसे कार्यों की सर्वाधिक मांग रही। विभिन्न प्रमाणपत्रों जैसे स्थानीय निवासी और आय प्रमाणपत्रों के लिए भी हजारों आवेदन आए। वहीं, आयुष्मान भारत और लाड़ली लक्ष्मी जैसी सरकारी योजनाओं के लिए अपेक्षाकृत कम आवेदन दर्ज किए गए। यह स्थिति नियमित प्रशासनिक सेवाओं में संभावित बाधाओं की ओर इशारा करती है, जिसके कारण नागरिकों को विशेष शिविरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।