मध्य प्रदेश सरकार ने परिवहन व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए राज्य परिवहन प्राधिकरण का पुनर्गठन किया है। सोमवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, अब प्राधिकरण के अध्यक्ष अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी होंगे, जबकि परिवहन आयुक्त सदस्य सचिव का दायित्व संभालेंगे। इस कदम से अंतरराज्यीय परमिट, रूट आवंटन और विवादों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। यह निर्णय हाल ही में बस किराया वृद्धि के बाद आया है, और मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का पहला चरण भी जल्द शुरू होने की संभावना है।
मध्य प्रदेश सरकार ने किसान आंदोलन के बाद ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन और स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथियां बढ़ा दी हैं। अब किसान 10 अगस्त तक मूंग उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कर सकेंगे, जबकि मूंग और उड़द का उपार्जन 20 अगस्त तक चलेगा। कृषि विभाग द्वारा लागू की गई इस संशोधित व्यवस्था के तहत, किसानों को आधार कार्ड और मोबाइल नंबर सहित अपना पूरा ब्योरा दर्ज करना होगा। मूंग का उपार्जन कृषकों के उत्पादन का 60 प्रतिशत तक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, समर्थन मूल्य पर उड़द बेचने वाले किसानों को प्रति क्विंटल 600 रुपये प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी, जिससे उन्हें आर्थिक मदद और उपार्जन में देरी से राहत मिलेगी।
मणिपुर में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी टैंकरों से जबरन वसूली का मामला सामने आया है, जहां सीआरपीएफ ने मणिपुर पुलिस पर वसूली के आरोप लगाए हैं। यह मुद्दा मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह तक पहुंचने के बाद राज्य सरकार ने एनएच-37 पर जबरन वसूली रोकने के लिए मौजूदा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की समीक्षा और संशोधन का निर्णय लिया है। एक समन्वय समिति का गठन किया गया है, जिसमें सीआरपीएफ और राज्य सरकार की एजेंसियां शामिल हैं, जो तीस दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। पेट्रोलियम संघों ने भी मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर इस समस्या पर प्रकाश डाला था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भोपाल में दूषित पेयजल आपूर्ति को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बड़े तालाब से सप्लाई होने वाले 90% पानी के सैंपल में ‘फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया’ मिला है, जबकि कोलार योजना के 25% सैंपल भी मानकों पर खरे नहीं उतरे। पटवारी ने पेयजल व्यवस्था को विफल बताते हुए जलजनित बीमारियों का खतरा जताया। कांग्रेस ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर एफआईआर और कड़ी कार्रवाई के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल व चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। कांग्रेस ने सुरक्षित पेयजल के अधिकार के लिए संघर्ष की चेतावनी भी दी।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की 40 अंतरराज्यीय बस रूटों की ‘विशेष परिवहन योजना’ पर बड़ा झटका दिया है। न्यायालय ने 7 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। निजी बस ऑपरेटर धर्मेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने अपनी व्यवसायिक अधिकारों के हनन और योजना में हितों के टकराव तथा कंपनी को एसटीयू का दर्जा न मिलने जैसे गंभीर सवाल उठाए हैं। सरकार के जवाब के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।
ग्वालियर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने पीएचई कर्मचारी गोपाल सिंह को सातवें वेतन आयोग का लाभ एक जनवरी 2016 से देने के पूर्व आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की एकलपीठ ने कहा कि आदेश में कोई प्रत्यक्ष त्रुटि नहीं है। सरकार ने आठ अगस्त 2022 के परिपत्र का हवाला देते हुए लाभ 15 दिसंबर 2016 से देने की दलील दी थी, जिसे अदालत ने समान मामलों में पूर्व निर्णयों के आधार पर निराधार माना।
कैग की रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल की पूर्व सरकार की चक्रवात अम्फान राहत योजना में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में नुकसान के आकलन को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने, राहत वितरण में गड़बड़ियों और लाभार्थियों की सूची में दोहराव जैसी खामियां सामने आईं। प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल मनीष कुमार ने बताया कि कैग ने राज्य सरकार को छह प्रमुख सिफारिशें दी हैं। कैग ऑडिट टीम ने राज्य सरकार के दावों का सत्यापन करने के लिए मौके पर जांच करने और कार्रवाई रिपोर्ट का सत्यापन करने की बात कही है।
मध्य प्रदेश में 1991 बैच के आईएएस अधिकारी अशोक बर्णवाल को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति मुख्य सचिव अनुराग जैन के नीति आयोग के सीईओ बनने के बाद हुई है। बर्णवाल से वरिष्ठ 1990 बैच के आईएएस डॉ. राजेश कुमार राजौरा और 1991 बैच के मनोज गोविल को पीछे छोड़ते हुए राज्य सरकार ने उन पर भरोसा जताया। बर्णवाल को शांत, निर्विवाद और मेहनती अधिकारी के रूप में जाना जाता है, जिनके पास विभिन्न विभागों का व्यापक प्रशासनिक अनुभव है और वे पूर्व मुख्यमंत्रियों के प्रमुख सचिव भी रह चुके हैं।
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद ‘लव जिहाद’ के मामलों में कमी आने की उम्मीद है। लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है और बल या कपट से सहमति प्राप्त करने पर पांच साल की सजा का प्रावधान है। यह कदम 2021 के धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की कम प्रभावशीलता के बाद उठाया गया है, जिसके तहत संगठित गिरोहों के खुलासे भी हुए थे।