केंद्र सरकार ने मेट्रो स्टेशन के नामकरण संबंधी नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिससे अब राज्य सरकारों को अपने शहरों में मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने का अधिकार मिल गया है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने इंदौर मेट्रो के एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी। पहले केंद्र की अनुमति के बिना गजट नोटिफिकेशन में दर्ज नाम नहीं बदले जा सकते थे। इस बदलाव से इंदौर के जनप्रतिनिधियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हो सकेगी, जिसमें बापट चौराहे स्टेशन का नाम पं. दीनदयाल उपाध्याय और गांधी नगर सहित अन्य स्टेशनों का नाम वीरांगनाओं के नाम पर रखने का सुझाव शामिल है।
मध्य प्रदेश सरकार लगभग साढ़े सात लाख शासकीय सेवकों के महंगाई भत्ते (DA) में 2 प्रतिशत की वृद्धि की योजना बना रही है, जिससे यह 58% से बढ़कर 60% हो जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस फैसले का ऐलान 15 अक्टूबर के बाद हो सकता है और इसे नवंबर के वेतन में जोड़ा जाएगा। यह 2 प्रतिशत डीए 1 जनवरी से लंबित है, जिसके 10 महीने के एरियर का एकमुश्त भुगतान दिवाली पर कर्मचारियों को बड़ा आर्थिक लाभ देगा। इस वृद्धि से राज्य सरकार पर प्रतिमाह 82 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
राज्य सरकार ने जबलपुर की बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार और मॉनिटरिंग के लिए हाईकोर्ट के समक्ष पांच विशेषज्ञों के नाम प्रस्तावित किए हैं, हालांकि इन्हें अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या जबलपुर की तर्ज पर प्रदेश के अन्य शहरों में भी ट्रैफिक सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की जा सकती है। याचिका में जबलपुर में ट्रैफिक सिग्नल, जाम और अतिक्रमण की गंभीर समस्या का उल्लेख है।
मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में बाजार से 1500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है, जिससे राज्य पर कुल ऋण बढ़कर 5 लाख 42 हजार 614 रुपये हो गया है। यह कर्ज राज्य के विभिन्न विकास कार्यक्रमों और परियोजनाओं के लिए दो किस्तों में लिया गया है, जिसकी अदायगी जुलाई 2044 और सितंबर 2056 तक होनी है। अप्रैल 2026 से अब तक सरकार 54 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। बढ़ते कर्ज को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आर्थिक स्थिति पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की है।
मध्य प्रदेश सरकार ने परिवहन व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए राज्य परिवहन प्राधिकरण का पुनर्गठन किया है। सोमवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, अब प्राधिकरण के अध्यक्ष अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी होंगे, जबकि परिवहन आयुक्त सदस्य सचिव का दायित्व संभालेंगे। इस कदम से अंतरराज्यीय परमिट, रूट आवंटन और विवादों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। यह निर्णय हाल ही में बस किराया वृद्धि के बाद आया है, और मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का पहला चरण भी जल्द शुरू होने की संभावना है।
मध्य प्रदेश सरकार ने किसान आंदोलन के बाद ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन और स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथियां बढ़ा दी हैं। अब किसान 10 अगस्त तक मूंग उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कर सकेंगे, जबकि मूंग और उड़द का उपार्जन 20 अगस्त तक चलेगा। कृषि विभाग द्वारा लागू की गई इस संशोधित व्यवस्था के तहत, किसानों को आधार कार्ड और मोबाइल नंबर सहित अपना पूरा ब्योरा दर्ज करना होगा। मूंग का उपार्जन कृषकों के उत्पादन का 60 प्रतिशत तक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, समर्थन मूल्य पर उड़द बेचने वाले किसानों को प्रति क्विंटल 600 रुपये प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी, जिससे उन्हें आर्थिक मदद और उपार्जन में देरी से राहत मिलेगी।
मणिपुर में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी टैंकरों से जबरन वसूली का मामला सामने आया है, जहां सीआरपीएफ ने मणिपुर पुलिस पर वसूली के आरोप लगाए हैं। यह मुद्दा मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह तक पहुंचने के बाद राज्य सरकार ने एनएच-37 पर जबरन वसूली रोकने के लिए मौजूदा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की समीक्षा और संशोधन का निर्णय लिया है। एक समन्वय समिति का गठन किया गया है, जिसमें सीआरपीएफ और राज्य सरकार की एजेंसियां शामिल हैं, जो तीस दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। पेट्रोलियम संघों ने भी मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर इस समस्या पर प्रकाश डाला था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भोपाल में दूषित पेयजल आपूर्ति को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बड़े तालाब से सप्लाई होने वाले 90% पानी के सैंपल में ‘फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया’ मिला है, जबकि कोलार योजना के 25% सैंपल भी मानकों पर खरे नहीं उतरे। पटवारी ने पेयजल व्यवस्था को विफल बताते हुए जलजनित बीमारियों का खतरा जताया। कांग्रेस ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर एफआईआर और कड़ी कार्रवाई के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल व चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। कांग्रेस ने सुरक्षित पेयजल के अधिकार के लिए संघर्ष की चेतावनी भी दी।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की 40 अंतरराज्यीय बस रूटों की ‘विशेष परिवहन योजना’ पर बड़ा झटका दिया है। न्यायालय ने 7 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। निजी बस ऑपरेटर धर्मेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने अपनी व्यवसायिक अधिकारों के हनन और योजना में हितों के टकराव तथा कंपनी को एसटीयू का दर्जा न मिलने जैसे गंभीर सवाल उठाए हैं। सरकार के जवाब के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।
ग्वालियर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने पीएचई कर्मचारी गोपाल सिंह को सातवें वेतन आयोग का लाभ एक जनवरी 2016 से देने के पूर्व आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की एकलपीठ ने कहा कि आदेश में कोई प्रत्यक्ष त्रुटि नहीं है। सरकार ने आठ अगस्त 2022 के परिपत्र का हवाला देते हुए लाभ 15 दिसंबर 2016 से देने की दलील दी थी, जिसे अदालत ने समान मामलों में पूर्व निर्णयों के आधार पर निराधार माना।