बुलंद सोच, भोपाल। मध्य प्रदेश के आदिवासी विकासखंडों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 90 प्रतिशत पद रिक्त हैं। स्वास्थ्य संचालनालय के आंकड़ों के अनुसार, स्वीकृत 674 विशेषज्ञ पदों में से केवल 68 कार्यरत हैं, जिनमें से 56 नियमित हैं। इससे मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों में जाना पड़ता है। चिकित्सा अधिकारियों के भी अधिकांश पद संविदा या बंधपत्र के अंतर्गत भरे हुए हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण सीजर डिलीवरी और आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को भी उपचार नहीं मिल पा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ रहा है।