इंदौर के प्रॉपर्टी बाजार में चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में तेजी देखी गई है। अप्रैल से जुलाई के बीच संपत्तियों के पंजीयन में पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि की तुलना में 8.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि राजस्व में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस अवधि में कुल 58,549 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जिससे पंजीयन विभाग को 820.41 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष से 100.98 करोड़ रुपये अधिक है। वरिष्ठ पंजीयक अमरेश नायडू के अनुसार, नए और शहरी सीमा से लगे क्षेत्रों में अधिक लेनदेन हो रहे हैं। पुराने इंदौर में हालांकि पंजीयन में कमी आई है।
भोपाल बीते 21 सालों से बिना मास्टर प्लान के अनियोजित ढंग से बढ़ रहा है, जिससे नागरिक ट्रैफिक जाम और अव्यवस्थित कॉलोनियों जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। शहर के लिए तीन बार मास्टर प्लान के ड्राफ्ट तैयार किए गए, लेकिन राजनीतिक खींचतान, बिल्डर सिंडिकेट और रसूखदारों की मिलीभगत के कारण कोई भी अंतिम रूप नहीं ले सका। 1995-2005 के प्रभावी प्लान की 34 में से 22 सड़कें भी नहीं बनीं। वर्तमान में 2031 का ड्राफ्ट 2020 से लंबित है, जबकि 2047 के लिए सर्वे जारी है। इससे शहर के सुनियोजित विकास में बाधा आ रही है।
इंदौर के बड़ियाकीमा क्षेत्र में एक प्रस्तावित कॉलोनी की जमीन को लेकर विवाद अब जांच के दायरे में है। मुंबई के कारोबारी महावीर वर्मा की शिकायत पर भूमाफिया संजीव लुंकड़ और स्नेहा लुंकड़ पर एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि 64 लाख रुपये में जमीन बेचने के बाद भी कॉलोनी विकसित नहीं की गई और कब्जा नहीं दिया गया। वर्मा ने अगस्त 2012 से जून 2015 के बीच 10,454 वर्गफीट के भूखंड के लिए भुगतान किया था, जिसकी रजिस्ट्री मई 2015 में हुई। जांच में पता चला है कि इस जमीन का एक हिस्सा 2008 में आइडियल इलेक्ट्रॉनिक्स प्रा. लि. को बेचा गया था, लेकिन उसे भी कब्जा नहीं मिला था।
इंदौर जिला प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों और भूमाफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है, जिसके तहत 133 कॉलोनियां चिन्हित की गई हैं। सुनवाई के बाद 21 कॉलोनियों को अवैध घोषित कर खसरे में दर्ज किया जाएगा और 30 से अधिक भू-स्वामियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। धोखाधड़ी रोकने के लिए प्रशासन जल्द ही क्रॉप्स पोर्टल का एक्सेस सार्वजनिक करेगा, जिससे नागरिक प्लॉट खरीदने से पहले कॉलोनी की वैधता जांच सकेंगे।
मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने उज्जैन के विक्रम उद्योगपुरी में 1250 आवासीय इकाइयों की नई कॉलोनी विकसित करने का विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजा है। लगभग एक दशक बाद यह उज्जैन में हाउसिंग बोर्ड की कोई नई आवासीय योजना होगी। यह पहल ऐसे समय में की गई है जब विक्रम उद्योगपुरी तेजी से विकसित हो रहा है, जहां 135 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को भूखंड आवंटित किए गए हैं और 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से 25 हजार रोजगार सृजित होने का अनुमान है। पुरानी शिवांगी परिसर योजना न्यायालयीन विवाद में फंसी है।
मध्य प्रदेश में 31,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 6 से 8 लेन का ‘नर्मदा प्रगति पथ’ विकसित किया जाएगा। यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे नर्मदा नदी के किनारे बनेगा और राज्य के 11 प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगा, जिससे मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी छोर आपस में जुड़ेंगे। यह मार्ग गुजरात और छत्तीसगढ़ के बीच सीधी कनेक्टिविटी भी स्थापित करेगा। कुल 906 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे प्रशासनिक, धार्मिक और पर्यटन केंद्रों को जोड़ेगा और 30 राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ेगा। मार्ग पर आधुनिक जन-सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे औद्योगिक विकास, रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
इंदौर जिला प्रशासन ने करोड़ों की जमीन पर विकसित की जा रही 21 कॉलोनियों को अवैध घोषित किया है। अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य ने सुनवाई के बाद इन कॉलोनियों की जानकारी राजस्व अभिलेख (खसरे) में दर्ज करने के आदेश जारी किए, जिससे इन जमीनों पर खरीदी-बिक्री और विकास पर रोक लग गई है। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर हुई जांच में 133 संदिग्ध कॉलोनियों की सूची तैयार की गई थी, जिसमें से प्रथम चरण में 21 पर कार्रवाई हुई। इन अवैध कॉलोनियों में 26 हेक्टेयर जमीन और 30 से अधिक भू-स्वामी शामिल हैं, जिनकी उलझनें बढ़ेंगी।
इंदौर में संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर की ऑनलाइन मैपिंग में गड़बड़ी के कारण संपत्ति रजिस्ट्रियां प्रभावित हो रही हैं। कई कॉलोनियों की लोकेशन गलत दर्ज होने से गाइडलाइन दरें बदल रही हैं और दस्तावेज सत्यापन पूरा नहीं हो पा रहा है। यह समस्या संपदा 2.0 की शुरुआत से पहले जल्दबाजी में की गई मैपिंग का परिणाम है। संपत्ति खरीदार सुधार के लिए पंजीयन कार्यालय पहुंच रहे हैं। तकनीकी सुधार के लिए आवेदनों को भोपाल भेजा जाता है, जिसमें चार से पांच दिन लगते हैं, जिससे रजिस्ट्री कार्य बाधित होता है। अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश स्थानों पर सुधार कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक के ध्वस्त ट्विन टावरों के घर खरीदारों की धन वापसी की मांग वाली याचिका पर सुनवाई तीन महीने के लिए स्थगित कर दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने यह निर्णय घर खरीदारों के दावों को पूरा करने के लिए अन्य विकल्पों का पता लगाने हेतु समय दिए जाने के अनुरोध पर लिया। पीठ ने यह भी नोट किया कि वैकल्पिक आवंटन का विकल्प न चुनने वाले खरीदारों के दावों को पूरा करने के प्रयास जारी हैं। सुपरटेक आईबीसी के तहत दिवालियापन की कार्यवाही का सामना कर रही है।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने इंदौर के देपालपुर स्थित गीता विहार कॉलोनी में बंधक रखे प्लॉट बेचने के आरोप में एसएम इन्फ्रा स्टेट प्रा. लि. के डायरेक्टर सुरेश ठाकुर और दिनेश जाट सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि कॉलोनी के विकास कार्यों के लिए कलेक्टोरेट में बंधक रखे गए भूखंड क्रमांक 88, 89, 90 और 124 को वर्ष 2018 में करीब 55.80 लाख रुपये में बेच दिया गया। आरोपितों ने बंधक स्थिति छिपाकर यह विक्रय किया, जिसके कारण खरीदारों को आज तक संपत्ति का वैध स्वामित्व नहीं मिल सका है।