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भोपाल राजस्व विभाग सीमांकन में प्रदेश में सबसे पीछे, सैकड़ों मामले लंबित

भोपाल का राजस्व विभाग नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे जैसे मामलों के निराकरण में प्रदेश के सबसे खराब पांच जिलों में शामिल है। सीमांकन में राजधानी पूरे राज्य में सबसे निचले पायदान पर है, जिससे सैकड़ों मामले महीनों से लंबित हैं। तहसीलदार की गैरमौजूदगी और रिकॉर्ड में गड़बड़ी प्रमुख कारण हैं। सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों में भी राजस्व विभाग 30,403 लंबित मामलों के साथ पहले नंबर पर है। भोपाल कलेक्टर प्रियांक मिश्रा ने लंबित मामलों में कमी आने और आगे भी सुधार का आश्वासन दिया है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 4.90 लाख मुकदमे लंबित, 11 न्यायाधीश पद खाली

मध्य प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में 8 और 9 अगस्त को इंदौर में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के 50 से अधिक न्यायाधीश न्याय व्यवस्था की चुनौतियों पर मंथन कर रहे हैं। 16 जुलाई 2026 तक मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगभग 4.90 लाख मुकदमे लंबित हैं, जिनमें 24,938 मामले 20 वर्ष से अधिक पुराने हैं। हाई कोर्ट में 53 स्वीकृत न्यायाधीश पदों में से लगभग 11 पद खाली हैं। सम्मेलन में तकनीक और सुधारों के साथ-साथ न्यायाधीशों की कमी और लंबित मामलों के वास्तविक अनुपात पर विचार की उम्मीद है ताकि न्यायपालिका को आधुनिक और पर्याप्त बनाया जा सके।

लोकायुक्त-ईओडब्ल्यू को 6.5 साल में 50 हजार से अधिक शिकायतें, कोर्ट पहुंचे केवल 486 मामले

मध्य प्रदेश में लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू को बीते साढ़े छह वर्षों में 50,453 शिकायतें मिलीं, जिनमें से केवल 486 मामले ही अदालत तक पहुंच पाए। विधानसभा में सरकार द्वारा दी गई इस जानकारी से भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की धीमी गति उजागर हुई है। लोकायुक्त को 27,192 शिकायतें मिलीं, जिनमें से 477 मामलों में चालान पेश हुए, जबकि ईओडब्ल्यू को 23,261 आवेदनों में से केवल 9 मामलों में ही अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जा सका। सेवानिवृत्त डीएसपी आरके सिंह ने बहुस्तरीय जांच प्रक्रिया को देरी का मुख्य कारण बताया।