मध्य प्रदेश में लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू को बीते साढ़े छह वर्षों में 50,453 शिकायतें मिलीं, जिनमें से केवल 486 मामले ही अदालत तक पहुंच पाए। विधानसभा में सरकार द्वारा दी गई इस जानकारी से भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की धीमी गति उजागर हुई है। लोकायुक्त को 27,192 शिकायतें मिलीं, जिनमें से 477 मामलों में चालान पेश हुए, जबकि ईओडब्ल्यू को 23,261 आवेदनों में से केवल 9 मामलों में ही अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जा सका। सेवानिवृत्त डीएसपी आरके सिंह ने बहुस्तरीय जांच प्रक्रिया को देरी का मुख्य कारण बताया।