मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता मिलती है। आगामी 39वीं किस्त अगस्त 2026 में आने की उम्मीद है, जिसके 10 अगस्त के आसपास सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर होने का अनुमान है। हालांकि, राज्य सरकार ने अभी तक कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है। योजना के तहत पहली बार सामाजिक अध्ययन और इंपैक्ट टेस्ट भी किया जाएगा। लाभार्थियों को सलाह दी गई है कि वे अपने बैंक खातों में डीबीटी सुविधा सक्रिय रखें।
मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत 38 किस्तें जारी हो चुकी हैं, जिसमें जुलाई 2026 में 1,500 रुपये की 38वीं किस्त दी गई थी। अब सवा करोड़ से अधिक महिलाएं 39वीं किस्त का इंतजार कर रही हैं। पिछले भुगतान पैटर्न के अनुसार, अगस्त 2026 की 39वीं किस्त 10 अगस्त के आसपास जारी होने की संभावना है, हालांकि कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लाभार्थियों के लिए बैंक खातों का आधार से लिंक होना, डीबीटी सक्रिय होना और समग्र ई-केवाईसी पूरा होना अनिवार्य है, अन्यथा भुगतान रुक सकता है। लाभार्थी आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी किस्त का स्टेटस जांच सकते हैं।
मध्य प्रदेश सरकार लाड़ली बहना योजना के वास्तविक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का गहन अध्ययन कराएगी। योजना के दो वर्ष पूरे होने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान यह पड़ताल करेगा कि मासिक आर्थिक सहायता ने महिलाओं के जीवन में कितना बदलाव लाया है। अध्ययन में राशि के उपयोग, आर्थिक स्थिति में सुधार, बच्चों की शिक्षा व स्वास्थ्य पर प्रभाव, स्वरोजगार के अवसर और घरेलू वित्तीय निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी का मूल्यांकन किया जाएगा। यह अध्ययन भविष्य में योजना में सुधार का आधार बनेगा, जैसा कि महाराष्ट्र और ओडिशा के समान अध्ययनों में सकारात्मक परिणाम देखे गए हैं।
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में पिछले तीन वर्षों से नए पंजीयन बंद हैं, जिसके परिणामस्वरूप इंदौर जिले में अब तक 19,654 महिलाएं योजना से बाहर हो चुकी हैं। शुरुआत में 4.57 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे, जबकि वर्तमान में 4.38 लाख महिलाओं को ही लाभ मिल रहा है। योजना से बाहर होने का सबसे बड़ा कारण 60 वर्ष की आयु पूरी करना है, जिससे 14,151 महिलाएं प्रभावित हुई हैं। अन्य कारणों में अपात्रता, स्वयं छोड़ना, मृत्यु और आईडी संबंधी समस्याएं शामिल हैं। राशि 1,000 रुपये से बढ़कर 1,500 रुपये हो गई है, लेकिन नए लाभार्थियों को शामिल नहीं किया जा रहा है।