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मध्य प्रदेश यूसीसी में ‘लव जिहाद’ पर शिकंजा: लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य, धोखाधड़ी पर 5 साल की जेल

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद ‘लव जिहाद’ के मामलों में कमी आने की उम्मीद है। लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है और बल या कपट से सहमति प्राप्त करने पर पांच साल की सजा का प्रावधान है। यह कदम 2021 के धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की कम प्रभावशीलता के बाद उठाया गया है, जिसके तहत संगठित गिरोहों के खुलासे भी हुए थे।

विवाहित महिला और लिव-इन पार्टनर को हाईकोर्ट से सुरक्षा नहीं

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक विवाहित महिला और उसके लिव-इन पार्टनर की सुरक्षा याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि वैध विवाह के रहते लिव-इन संबंध को न्यायिक मान्यता या संरक्षण नहीं दिया जा सकता। न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत ऐसे संबंध को अप्रत्यक्ष वैधता नहीं दी जा सकती जो वैध वैवाहिक संबंध के विपरीत हो। हालांकि, कोर्ट ने महिला को घरेलू हिंसा या अन्य कानूनी अधिकारों के उल्लंघन के लिए सक्षम न्यायालय में जाने का विकल्प दिया।

मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित

मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच मोहन यादव सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित कराया। यूसीसी लागू होने के बाद विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, उत्तराधिकार और महिलाओं-बच्चों के अधिकारों से जुड़े नए प्रावधान लागू होंगे। इसमें बेटे-बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार मिलेंगे, और लिव-इन संबंधों के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिसका उल्लंघन करने पर जुर्माना या जेल हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधेयक को महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता का कानून बताया और दावा किया कि 93% नागरिकों ने इसका समर्थन किया है।