प्रसिद्ध लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा है कि जेन-जी को विरोध प्रदर्शन का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन यह हमेशा संविधान की सीमाओं के भीतर होना चाहिए। पुणे में अपनी नई बाल पुस्तक ‘ध्रुव-तारा: द ग्रेट इंडियन हिस्ट्री क्विज’ के प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी ने आंदोलन किए हैं, इसलिए केवल जेन-जी को दोष देना उचित नहीं है। अमीश ने डॉ. आंबेडकर के ‘ग्रामर ऑफ अनार्की’ का जिक्र करते हुए संविधान की सर्वोच्चता पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय इतिहास पढ़ाने के तरीके में बदलाव और औपनिवेशिक सोच को हटाने की भी बात कही, जिसका उनकी नई पुस्तक के माध्यम से प्रयास किया गया है।
असम के प्रसिद्ध नेपाली साहित्यकार, लेखक और शिक्षाविद् पुष्पधर शर्मा को नेपाली भाषा और साहित्य में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भाषा सेवाश्री सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। कोलकाता की लैंनसिंह बांदेल साहित्य और कला प्रतिष्ठान ने इस वर्ष के सम्मान के लिए उनके नाम की घोषणा की है। यह सम्मान 23 अगस्त को कोलकाता में एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाएगा। शर्मा ने इस सम्मान को गर्व का विषय बताया और कहा कि यह उनकी जिम्मेदारियों को और बढ़ाएगा, जिससे उन्हें नेपाली भाषा के लिए अधिक गंभीरता से काम करने की प्रेरणा मिलेगी।