मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में तीन आरोपितों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने मृतक संतोष उर्फ लखन औी द्वारा अपने पिता को भेजे गए वाट्सएप मैसेज को महत्वपूर्ण “मृत्युपूर्व कथन” माना। न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई ने धार के विशेष न्यायालय के 27 जुलाई के आदेश को बरकरार रखा। आरोपितों करण जाट, धर्मेंद्र जाट और उमेश जाट पर कृषि भूमि विवाद में मृतक को परेशान करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। हाई कोर्ट ने वाट्सएप मैसेज और मृतक के परिवार के सदस्यों के बयानों को महत्वपूर्ण साक्ष्य मानते हुए आरोपितों की दलीलों को अस्वीकार कर दिया।