तमिलनाडु विधानसभा ने सोमवार को राज्य गीत ‘तमिल थाई वाजथु’ को शिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में कार्यक्रमों की शुरुआत से पहले अनिवार्य करने का प्रस्ताव पारित किया। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने यह प्रस्ताव पेश किया, जिसे द्रमुक, अन्नाद्रमुक और कांग्रेस ने समर्थन दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘तमिल थाई वाजथु’ को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए और यह राज्य का अधिकार है। उन्होंने मातृभाषा को पवित्र बताते हुए सदस्यों से सर्वसम्मति से समर्थन की अपील की।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें संसद में राज्य के प्रतिनिधित्व को कम करने वाले किसी भी परिसीमन का विरोध किया गया है। प्रस्ताव में केंद्र से लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 पर बरकरार रखने का आग्रह किया गया है। यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई एक परामर्श बैठक के बाद आया है, जिसमें दक्षिणी राज्यों पर परिसीमन के संभावित प्रभावों पर चर्चा हुई थी। मुख्यमंत्री विजय ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव में मौजूदा 543 सीटों के आधार पर लागू करने की भी मांग की, इसे सामाजिक न्याय बताया।
मध्य प्रदेश में आगामी वित्तीय वर्ष के बजट की तैयारियां शुरू हो गई हैं। वित्त विभाग ने सभी विभागों को अनुसूचित जनजाति के लिए 23 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के लिए 16 प्रतिशत, कुल 39 प्रतिशत बजट प्रविधान रखने के निर्देश दिए हैं। विभागों को उपयोजना की राशि का उपयोग किन क्षेत्रों और योजनाओं में प्रस्तावित है, इसका स्पष्ट ब्योरा देना होगा। यह कदम उपयोजना के बजट के ऐसे क्षेत्रों में उपयोग होने के सवालों के बाद उठाया गया है, जिनका सीधा संबंध इन समुदायों से नहीं है। वर्ष 2026-27 में अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए ₹47,429 करोड़ (25.8%) और अनुसूचित जाति के लिए ₹31,192 करोड़ (17%) का प्रावधान किया गया है।
बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे आज घोषित किए जाएंगे। शुरुआती रुझानों के अनुसार, बांकीपुर में प्रशांत किशोर आगे चल रहे हैं, जबकि मांजलपुर और दतिया में भाजपा ने बढ़त बनाई है। मांजलपुर में भाजपा के सतेंद्रभाई पटेल 12941 वोटों के साथ आगे हैं, वहीं बांकीपुर में प्रशांत किशोर 2225 वोटों से शीर्ष पर हैं। दतिया में पहले राउंड के बाद भाजपा 909 वोटों से आगे रही। इन सीटों पर विधायकों के इस्तीफे, सदस्यता रद्द होने और निधन के कारण उपचुनाव हुए थे।
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव परिणाम पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं। पिछले 12 वर्षों (2014-2026) के उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहा है, जिसने 52 में से 63 प्रतिशत सीटें जीती हैं। वहीं, कांग्रेस को 37 प्रतिशत सफलता मिली। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सत्ताधारी दल को अक्सर बढ़त मिलती है, हालांकि उम्मीदवार की लोकप्रियता भी मायने रखती है। दतिया का फैसला प्रदेश की राजनीतिक दिशा का संकेत देगा।
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान 30 जुलाई को संपन्न हो गया है, जिसके परिणाम अगस्त के तीसरे सोमवार को आने हैं। ये परिणाम प्रदेश की भाजपा सरकार की स्थिरता पर असर नहीं डालेंगे, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से इन्हें बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव की रणनीति, संगठन और राजनीतिक समीकरणों का शुरुआती संकेत देगा, साथ ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा जैसे नेताओं की भूमिका पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव में गुरुवार को 71.44% मतदान हुआ, जिसका परिणाम पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक भविष्य तय करेगा। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की जीत या हार से मिश्रा की आगामी भूमिका निर्धारित होगी। टिकट न मिलने पर उनके समर्थकों ने प्रदर्शन किया, लेकिन मिश्रा पार्टी लाइन पर बने रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की जीत मिश्रा के लिए नई भूमिका के द्वार खोल सकती है। परिणाम 3 अगस्त को घोषित होंगे, जिससे मिश्रा के 20 हजार से अधिक वोटों से जीत के दावे की पुष्टि होगी या उनकी राजनीतिक पकड़ पर सवाल खड़े होंगे।
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए आज मतदान हो रहा है। कुल 2,20,410 मतदाता 21 प्रत्याशियों का भाग्य तय करेंगे, जिसमें भाजपा से आशुतोष तिवारी और कांग्रेस से घनश्याम सिंह प्रमुख उम्मीदवार हैं। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक 291 केंद्रों पर होगा। यह सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता एक पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में समाप्त होने के बाद खाली हुई थी। चुनाव परिणाम 3 अगस्त को आएंगे। दतिया में 2023 विधानसभा चुनाव में 80.20% का रिकॉर्ड मतदान हुआ था।
बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों बांकीपुर, दतिया और मंजलपुर पर 30 जुलाई को उपचुनाव हो रहे हैं। ये सीटें भाजपा शासित राज्यों में हैं, हालांकि दतिया पर कांग्रेस का कब्जा था। बांकीपुर सीट भाजपा विधायक नितिन नवीन के राज्यसभा जाने, दतिया सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने और मंजलपुर सीट भाजपा विधायक योगेश पटेल के निधन से खाली हुई है। इन उपचुनावों में छात्रों के मुद्दे, शिक्षा व्यवस्था, कानून-व्यवस्था, कृषि संबंधी समस्याएं और स्थानीय नागरिक मुद्दे प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल इन सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।
दतिया विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरण और उम्मीदवारों के व्यक्तिगत संपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भाजपा ब्राह्मण-सवर्ण-वैश्य और ओबीसी वोटों को एकजुट करने पर केंद्रित है, जबकि कांग्रेस जाटव-अहिरवार और अल्पसंख्यक वोटों पर भरोसा कर रही है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह का व्यक्तिगत संपर्क भाजपा के लिए चुनौती है, वहीं आशुतोष तिवारी की जातीय पृष्ठभूमि और सत्ता-संगठन की ताकत भाजपा के पक्ष में काम कर सकती है। 30 जुलाई को मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा कि मतदाताओं ने किस कारक को अधिक महत्व दिया।