मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक विपक्ष के भारी हंगामे और कांग्रेस के विरोध के बीच बहुमत से पारित हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में विधेयक पर वक्तव्य देते हुए विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया और कहा कि 93% नागरिकों ने यूसीसी का समर्थन किया है। इस विधेयक के तहत सभी विवाहों का सरकारी पंजीयन अनिवार्य होगा और बहुविवाह पर प्रतिबंध लगेगा। मध्य प्रदेश उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाने वाला देश का चौथा प्रमुख राज्य बन गया है।
मध्य प्रदेश विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 पारित कर दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे प्रदेश के इतिहास का ऐतिहासिक दिन बताया, कहा कि यह कानून समानता, सामाजिक न्याय और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा। विधेयक अब राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। यूसीसी लागू होने पर सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था होगी, जिसमें एक से अधिक विवाह को अपराध माना जाएगा और महिलाओं को उत्तराधिकार में पुरुषों के समान अधिकार मिलेंगे। मध्य प्रदेश उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद यूसीसी पारित करने वाला चौथा राज्य बन गया है। कानून में लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पर दिनभर हंगामा हुआ, जिसे सरकार ने विपक्ष के विरोध और दो बार कार्यवाही स्थगित होने के बावजूद पारित करा लिया। कांग्रेस ने यूसीसी को प्रवर समिति को भेजने की मांग की थी। वहीं, पेपर लीक मामले पर चर्चा की अनुमति न मिलने से नाराज कांग्रेस विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरना दिया।
मध्यप्रदेश विधानसभा में पेश निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2026 को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार उच्च शिक्षा का निजीकरण कर उसे उद्योग में बदलना चाहती है। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने ₹5 करोड़ सुरक्षा राशि और 2500 वर्गमीटर भूमि की अनिवार्यता खत्म करने पर सवाल उठाए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा है कि यह उच्च शिक्षा के व्यापारीकरण को बढ़ावा देगा और गुणवत्ता को प्रभावित करेगा।
मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच मोहन यादव सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित कराया। यूसीसी लागू होने के बाद विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, उत्तराधिकार और महिलाओं-बच्चों के अधिकारों से जुड़े नए प्रावधान लागू होंगे। इसमें बेटे-बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार मिलेंगे, और लिव-इन संबंधों के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिसका उल्लंघन करने पर जुर्माना या जेल हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधेयक को महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता का कानून बताया और दावा किया कि 93% नागरिकों ने इसका समर्थन किया है।