रतलाम में बिहार की 23 वर्षीय संध्या कुमारी की संदिग्ध मौत ने अंतरराज्यीय विवाह कराने वाले दलालों के नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में विवाह के लिए 2.60 लाख रुपये के भुगतान और बिचौलियों की संलिप्तता सामने आई है। मालवा-निमाड़ में बिहार, यूपी जैसी जगहों से युवतियों से विवाह का चलन बढ़ा है, जहाँ दूल्हा पक्ष से ढाई से पांच लाख रुपये लिए जाते हैं। इन विवाहों में सत्यापन की कमी और ठगी की घटनाएं आम हैं। शासकीय अधिवक्ता ने मानव तस्करी के पहलुओं की जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है, जबकि डीआईजी रतलाम रेंज ने दलालों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
रतलाम में एक नवविवाहिता संध्या कुमारी की मकान की तीसरी मंजिल से रस्सी के सहारे उतरने के प्रयास में गिरने से मौत हो गई। 23 वर्षीय संध्या, जो बिहार से विवाह कर रतलाम लाई गई थीं, की शादी 10-12 दिन पहले 45 वर्षीय मुकेश कुमार चौहान से हुई थी। जांच में विवाह की प्रक्रिया संदेह के घेरे में है, क्योंकि पति ने दलाल को 2.60 लाख रुपये देकर शादी की थी। पुलिस फर्जी विवाह गिरोह की भूमिका की जांच कर रही है।
केरल के कोट्टायम जिले के चंगनाशेरी में एक अनोखी शादी चर्चा का विषय बन गई है, जहां जुड़वा भाइयों अखिल के. थॉमस और निखिल के. थॉमस ने जुड़वा बहनों मैगी मैरी थॉमस और मारिया मैरी थॉमस से विवाह किया। इस समारोह की विशेषता यह रही कि शादी की रस्में भी जुड़वा पादरियों फादर एंटो पेझुमकाट्टिल और फादर अजो पेझुमकाट्टिल ने संपन्न कराईं, और वेदी पर सहयोग करने वाले बाल-सेवक भी जुड़वा थे। यह अनोखा आयोजन दोनों परिवारों और उपस्थित लोगों के लिए यादगार अनुभव रहा।
इंदौर में एक नवविवाहित जोड़े का विवाह मात्र सात दिन में समाप्त हो गया। पत्नी ने विवाह को अपनी मर्जी के खिलाफ बताते हुए पति के साथ रहने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों ने आपसी सहमति से परिवार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जिला न्यायालय में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत एक वर्ष तक अलग रहने की शर्त पर याचिका की सुनवाई योग्यता का सवाल उठा। पत्नी की बातें सुनने के बाद पति ने तलाक का फैसला किया, जिस पर पत्नी भी सहमत थी। न्यायालय ने परिस्थितियों को देखते हुए सात दिनों के भीतर ही तलाक को मंजूरी दे दी।
अभिनेता आमिर खान ने 5 जुलाई को मुंबई में गौरी स्प्रैट से तीसरी शादी की, जिसका पंजीकरण स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत किया गया। इस निजी समारोह में परिवार और करीबी दोस्त शामिल हुए। इस शादी को लेकर सेलेब्रिटीज, राजनेताओं और धार्मिक नेताओं से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। हिना खान ने इसे सामाजिक रूप से अच्छा नहीं माना, जबकि महाराष्ट्र के मंत्रियों ने ‘लव जिहाद’ पर सवाल उठाए और यूपी के चीफ मुफ्ती ने इसे नाजायज बताया। आमिर खान ने आरोपों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी किसी भी पत्नी ने धर्म परिवर्तन नहीं किया और उनकी शादियां सिविल मैरिज थीं।
मुरैना में पग फेरे की रस्म के दौरान एक नवविवाहिता गहने और नकदी लेकर फरार हो गई। पति जब शगुन की मिठाई लेने गया था, तभी यह घटना हुई। पीड़ित पति गिर्राज सिंह ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस के अनुसार, युवती पहले भी हाथरस के एक युवक के साथ जा चुकी है और इस संबंध में पिनाहट थाने में मामला दर्ज है। महुआ थाना प्रभारी ने बताया कि विवाहिता की तलाश में एक टीम रवाना की गई है।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बहू और बेटे को कथित अवैध बंधन से मुक्त कराने वाली हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे पारिवारिक विवाद माना और कहा कि तथ्यों को छिपाया गया है। खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के बेटे नीरज की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए, जिसे पहले 75 प्रतिशत मानसिक दिव्यांग बताया गया था। कोर्ट ने पूछा कि यदि वह अस्वस्थ था तो उसकी शादी क्यों कराई गई और वह पिता कैसे बना। नीरज को न्यायालय में बुलाने पर उसका व्यवहार सामान्य प्रतीत हुआ।
मध्य प्रदेश विधानसभा ने मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) समेत 8 विधेयक पारित किए, जिससे मध्य प्रदेश यूसीसी पारित करने वाला चौथा भाजपा शासित राज्य बन गया है। इस विधेयक के तहत सितंबर 2008 के बाद हुए सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिसे यूसीसी लागू होने के एक वर्ष के भीतर कराना होगा। यह कानून राज्य के बाहर रहने वाले मध्य प्रदेश के निवासियों पर भी लागू होगा। सरकारी या निजी नौकरी में वैवाहिक स्थिति बदलने के लिए विवाह पंजीकरण प्रमाण-पत्र अनिवार्य होगा। संपत्ति विवादों में अदालत रक्षक नियुक्त कर सकेगी। सदन में यूसीसी पर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक विवाहित महिला और उसके लिव-इन पार्टनर की सुरक्षा याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि वैध विवाह के रहते लिव-इन संबंध को न्यायिक मान्यता या संरक्षण नहीं दिया जा सकता। न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत ऐसे संबंध को अप्रत्यक्ष वैधता नहीं दी जा सकती जो वैध वैवाहिक संबंध के विपरीत हो। हालांकि, कोर्ट ने महिला को घरेलू हिंसा या अन्य कानूनी अधिकारों के उल्लंघन के लिए सक्षम न्यायालय में जाने का विकल्प दिया।