भोपाल की सरकारी प्रयोगशाला में घी के नमूनों में निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक लेड (सीसा) और वेजिटेबल फैट (वनस्पति वसा) पाया गया है, जिससे यह जनस्वास्थ्य का गंभीर मुद्दा बन गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, लेड की कोई भी मात्रा सुरक्षित नहीं है और यह बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा वयस्कों में मस्तिष्क, किडनी व हृदय सहित विभिन्न अंगों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर ए.एस. परिहार ने बताया कि नकली घी में वेजिटेबल ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट मिलाए जाते हैं, जो केवल लैब जांच में ही पता चलते हैं।