भारतीय एथलीट सोमवार को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पहली बार ट्रैक एंड फील्ड में उतरेंगे। मेंस हाई जंप फाइनल में तेजस्विन शंकर, सर्वेश कुशारे और जे. आदर्श राम पदक के लिए चुनौती पेश करेंगे। वेटलिफ्टिंग में ज्ञानेश्वरी यादव, बिंद्यारानी देवी और वी. अजया बाबू से तीन पदक की उम्मीद है, जो सीधे मेडल इवेंट में भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त, भारतीय खिलाड़ी बॉक्सिंग, तैराकी, पैरा एथलेटिक्स, आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स, लॉन बॉल्स और व्हीलचेयर बास्केटबॉल में भी प्रतिस्पर्धा करेंगे, जिसमें विभिन्न स्पर्धाओं में भारतीय एथलीटों का प्रदर्शन देखा जाएगा।
ऋषिकांत सिंह ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 264 किलो वजन उठाकर रजत पदक जीता। यह पदक उनके परिवार के 15-16 साल के अथक संघर्ष का परिणाम है। उनकी मां और बहनों ने खेतों में मजदूरी की, बड़े भाई अमरजीत सिंह ने दोस्तों से कर्ज लेकर डाइट व प्रतियोगिताओं का खर्च उठाया। पिता को ब्लड कैंसर होने के बावजूद परिवार ने ऋषिकांत की तैयारी प्रभावित न हो, इसके लिए इलाज के लिए उनसे पैसे नहीं लिए। ऋषिकांत ने अपनी बहनों की शादियां भी महत्वपूर्ण मुकाबलों के कारण छोड़ दीं। परिवार ने अपने सपनों का त्याग कर ऋषिकांत के खेल करियर को आगे बढ़ाया।
भारत की शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं के पैरा शॉट पुट F57 इवेंट में 9.81 मीटर के सीजन बेस्ट थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता, जो देश का दूसरा स्वर्ण है। शिल्पा के. शायला ने इसी इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। भारत के मेडल टैली में कुल 10 मेडल हो गए हैं। सर्वेश कुशारे ने हाई जंप में सिल्वर, अजय बाबू ने वेटलिफ्टिंग में सिल्वर, बिंदियारानी देवी ने ब्रॉन्ज और ज्ञानेश्वरी यादव ने सिल्वर जीता। खिलाड़ियों ने अपने संघर्षपूर्ण सफर के बाद यह उपलब्धि हासिल की है।