भोपाल के मोती मस्जिद के सामने महीनों से लगे बैरिकेड्स बुधवार को पुलिस ने हटा दिए, जिससे अब केवल टू-व्हीलर गुजर सकेंगे। व्यापारियों ने इस आंशिक बदलाव को अपर्याप्त बताते हुए बैरिकेड्स को पूरी तरह हटाने की मांग की है। 7 अगस्त को बड़े प्रदर्शन के बाद सांसद आलोक शर्मा और पुलिस कमिश्नर संजय कुमार की बैठक के उपरांत यह कार्रवाई हुई। व्यापारियों का कहना है कि दमकल और कारें अभी भी बाजार में प्रवेश नहीं कर पाएंगी, जिससे समस्या बनी रहेगी। बैरिकेडिंग के कारण यातायात और आपातकालीन सेवाओं में बाधा आ रही है, जैसा कि 1 अगस्त को एक आग बुझाने में हुई देरी से स्पष्ट हुआ था।
इंदौर नगर निगम सड़कों के गड्ढे भरने पर प्रतिदिन लगभग 14 लाख रुपये और सालाना 50 करोड़ रुपये खर्च करता है। इतनी भारी राशि खर्च होने के बावजूद शहर की सड़कें बदहाल हैं और गड्ढे कम नहीं हो रहे हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी 50 करोड़ के वार्षिक बजट को स्वीकार किया है। लगभग 70 प्रतिशत सीमेंटेड सड़कों पर डामर के पैचवर्क की प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि बारिश में डामर हट जाता है। जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर ने बताया कि वर्षा के कारण काम रुका है और ठेकेदार बारिश थमने पर बिना अतिरिक्त शुल्क के दोबारा पैचवर्क करेंगे।
इंदौर के 56 दुकान क्षेत्र में एक आठ फीट चौड़े पैदल पुल पर अतिक्रमण कर दुकानें लगा दी गई हैं, जहां कपड़े, इमिटेशन ज्वेलरी और जूते जैसे सामान बेचे जा रहे हैं। ग्राहकों की भीड़ के कारण राहगीरों को चलने में दिक्कत हो रही है। पहले सड़क पर सामान बेचने वाले दुकानदारों को नगर निगम ने हटाया था, जिसके बाद उन्होंने पैदल पुल को अस्थायी दुकान के लिए चुना। नगर निगम को इस नए प्रकार के अतिक्रमण की जानकारी नहीं थी।
इंदौर के सत्यसाई चौराहे पर फ्लायओवर का निर्माण ढाई साल से अधिक समय से चल रहा है, जिससे हजारों वाहन चालकों को प्रतिदिन परेशानी हो रही है। परियोजना के लिए वर्क ऑर्डर मार्च 2024 में जारी हुआ था और इसे मार्च 2026 तक पूरा होना था, लेकिन अब तक इसमें लगभग चार महीने की देरी हो चुकी है। पिछले साल, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने गलत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर अधिकारियों को फटकार लगाई थी, क्योंकि बताई गई 36% प्रगति के मुकाबले वास्तविक कार्य केवल 8% था। एमपीआरडीसी ने अब सभी शुरुआती बाधाओं को दूर करने और जल्द ही फ्लायओवर को जनता के लिए खोलने का दावा किया है।
इंदौर में सड़कों की बदहाली को लेकर नगर निगम अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ने आश्वस्त किया है कि मास्टर प्लान की 23 सड़कों का काम पूरा होने के बाद शहर की तस्वीर बदल जाएगी। उन्होंने बताया कि इसमें कम से कम दो साल लगेंगे। अमृत 2.0 और अन्य सड़कों पर भी काम चल रहा है, लेकिन पुराने क्षेत्रों में पुरानी लाइनों के कारण चुनौतियां आती हैं। आयुक्त ने सार्वजनिक शिकायतों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया और बताया कि जेट मिक्स मशीनों से पेचवर्क शुरू हो गया है, जिसका असर दो सप्ताह में दिखेगा।