वर्ष 2023 में 35 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को चौथा समयमान वेतनमान देने का निर्णय लिया गया था, जिसके आदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किए। हालांकि, मंत्रालय, विधानसभा और लोकभवन के कर्मचारियों को तीन साल बाद भी इसका लाभ नहीं मिला, जबकि शिक्षक और पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी संवर्ग को यह लाभ दे दिया गया। इस असमानता के कारण कर्मचारियों में भारी असंतोष है। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने जल्द निर्णय न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ अध्यक्ष सुधीर नायक ने बताया कि कैबिनेट अनुमोदन के लिए प्रकरण तीन साल से लंबित है।
मध्य प्रदेश में 7 अगस्त से ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान’ शुरू होगा, जिसका पहला जिला स्तरीय ‘समाधान कार्यक्रम’ छिंदवाड़ा में आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं CM हेल्पलाइन में दर्ज चुनिंदा शिकायतों की समीक्षा करेंगे। CM कार्यालय ने अधिकारियों को शिकायतों का वास्तविक निपटारा सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। 3 अगस्त तक 20-25 शिकायतें चुनी जाएंगी, जिनकी समाधान रिपोर्ट 5 अगस्त तक ‘CM हेल्पलाइन पोर्टल’ पर अपलोड होगी। मुख्यमंत्री 5 सबसे अहम शिकायतों की सीधी पड़ताल करेंगे, जिसमें शिकायतकर्ता भी मौजूद रहेंगे और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
भोपाल, जिसे झीलों का शहर कहा जाता है, गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहा है, जहाँ तालाबों, पहाड़ियों और हरित क्षेत्रों पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है। इसके विपरीत, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्यों ने तालाब संरक्षण के लिए अलग प्राधिकरण स्थापित किए हैं और नियम तोड़ने वालों के लिए 5 साल तक की जेल का प्रावधान किया है। भोपाल में प्राकृतिक संपदा के संरक्षण की जिम्मेदारी विभिन्न एजेंसियों में बंटी हुई है, जिससे समन्वय की कमी और कार्रवाई में जिम्मेदारी तय न हो पाने की समस्या है।
उज्जैन की श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति, जिसे हाल ही में ई-गवर्नेंस पुरस्कार मिला है, की आधिकारिक वेबसाइट भारत सरकार के जीआईजीडब्ल्यू 3.0 मानकों का पालन नहीं कर रही है। वेबसाइट पर पारदर्शिता, जवाबदेही और श्रद्धालुओं के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा से जुड़ी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। भक्तों द्वारा आधार कार्ड अपलोड करने जैसी स्थितियों में डेटा संरक्षण नीतियों की अनुपलब्धता चिंता का विषय है। भस्म आरती सहित अन्य सेवाओं की ऑनलाइन बुकिंग में भी पारदर्शिता की कमी पाई गई है। इस संबंध में अधिकारियों ने पांच दिन बाद भी कोई जवाब नहीं दिया है।