भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षक भर्ती-2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर छह दिनों से चल रहे अनिश्चितकालीन धरने में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पहुँचे। उन्होंने अभ्यर्थियों की मांगों का समर्थन करते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो वे 5 सितंबर से 24 घंटे की भूख हड़ताल करेंगे। दिग्विजय सिंह ने अपने शासनकाल में 45 हजार नए स्कूल खोलने और स्थानीय रोजगार के अधिकार देने का उल्लेख किया। उन्होंने नए पाठ्यक्रम और सरकार पर युवाओं को शिक्षा व रोजगार के बजाय अन्य मुद्दों में उलझाने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारी महिला अभ्यर्थियों ने उन्हें राखी भी बांधी।
मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा की जमीनी हकीकत चिंताजनक है, जहां 12वीं की पढ़ाई पूरी करने से पहले ही 62.7% बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं। यूडाइस रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का Retain Rate घटकर 37.3% रह गया है, जबकि राष्ट्रीय औसत 51.9% है। बीते सत्र में 15.25 लाख बच्चे स्कूलों से गायब थे, और इस साल 11.12 लाख छात्र ‘ड्रॉपबॉक्स’ में शामिल हैं। प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने और स्कूलों के मर्जर से बढ़ी दूरी को इसका एक प्रमुख कारण बताया गया है, जिससे गरीब परिवारों को बच्चों की पढ़ाई छुड़ानी पड़ रही है।
मध्य प्रदेश में सेवारत शिक्षकों के लिए पहली बार आयोजित हो रही शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आवेदन की अंतिम तिथि 18 सितंबर तक बढ़ा दी गई है। आवेदन में संशोधन 20 सितंबर तक संभव होगा। कम आवेदन आने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग और कर्मचारी चयन मंडल ने यह निर्णय लिया। यह परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के आदेश के बाद 1998 से 2009 के बीच नियुक्त प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षकों के लिए हो रही है। शिक्षक संगठनों की मांग पर ऑफलाइन परीक्षा का विकल्प भी दिया गया है, हालांकि ₹1,000 परीक्षा शुल्क में राहत पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।
धार जिले के बदनावर स्थित खंडीगारा शासकीय प्राथमिक विद्यालय अपनी पारंपरिक छवि को बदल रहा है, जहाँ बच्चे खेल-खेल में संस्कृत के श्लोक और कविताएं सीख रहे हैं। तीन शिक्षिकाएं नीतू दुबे, चंदनबाला कुमावत और रानी राठौर बच्चों को किताबों के साथ संस्कार, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का पाठ पढ़ा रही हैं। विद्यालय में योग, प्रार्थना, सुविचार और माचिस की डिब्बी से हाजिरी जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद, लगभग 80 प्रतिशत बच्चे नियमित रूप से स्कूल आते हैं, जिससे अभिभावकों का भरोसा बढ़ा है।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों के साथ नई दिल्ली में संवाद किया। इस दौरान उन्होंने खुद को विद्यार्थी मानते हुए एक शिक्षिका से कुशल वक्ता बनने के सुझाव मांगे। शिक्षिका ने आत्मविश्वास और निरंतर अभ्यास को महत्वपूर्ण बताया, जिस पर पीएम मोदी और शिक्षकों के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत हुई और हंसी के ठहाके लगे। पीएम मोदी ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम, नशे के खतरों, रचनात्मक गतिविधियों और बचपन के संरक्षण जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी शिक्षकों को संदेश दिया। उन्होंने काशी में स्तन कैंसर जागरूकता अभियान का भी उल्लेख किया।
जबलपुर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना के मामले में राज्य सरकार को चार सप्ताह का अंतिम समय दिया है। इस फैसले से प्रदेश के लगभग 70 हजार शिक्षकों को वरिष्ठता, मासिक वेतन में 15 से 20 हजार रुपये की वृद्धि और 10 साल तक का एरियर (प्रति शिक्षक 7-8 लाख रुपये) सहित वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद है। उच्चतम न्यायालय द्वारा राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका खारिज किए जाने के बाद उच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह मोहलत दी है। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में तय है।
भोपाल में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने रविवार से नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया। यह आंदोलन शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता समाप्त करने, प्रथम नियुक्ति की तारीख से सेवा अवधि और वरिष्ठता की गणना करने, तथा ई-अटेंडेंस व्यवस्था समाप्त करने की तीन प्रमुख मांगों को लेकर है। प्रदर्शन चरणबद्ध तरीके से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न संभागों के शिक्षक शामिल होंगे। मोर्चे ने मुख्यमंत्री से सीधी चर्चा की मांग की है, चेतावनी दी है कि समाधान न होने पर आंदोलन जारी रहेगा।
भोपाल में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा का अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को तीसरे दिन भी नीलम पार्क में जारी रहा। आंदोलनरत शिक्षकों ने टीईटी परीक्षा का बहिष्कार करने और फॉर्म न भरने का आह्वान किया है। उनकी प्रमुख मांगों में आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखना और अव्यवहारिक ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त करना शामिल है। मोर्चा पदाधिकारियों ने ठोस निर्णय न होने तक धरना जारी रखने की बात कही। इस बीच, मध्य प्रदेश सरकार पर 1500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज बढ़कर कुल 5.42 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर सुनवाई पूरी हो गई है और फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। मुख्य सवाल यह है कि क्या सरकारी काम के लिए कर्मचारियों को निजी मोबाइल और इंटरनेट जैसे संसाधनों का उपयोग करने के लिए बाध्य किया जा सकता है। मैहर जिले के सत्येंद्र सिंह तिवारी की याचिका में शिक्षकों को निजी संसाधन उपयोग करने की मजबूरी और व्यक्तिगत डिजिटल जानकारी के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया गया है। कोर्ट के फैसले से ई-अटेंडेंस की जिम्मेदारी और निजी संसाधनों के उपयोग की सीमा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने शिक्षकों को उफनते नदी-नाले पार न करने और सुबह 10:30 बजे तक ई-अटेंडेंस लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही पर वेतन काटा जा सकता है और शिक्षकों को समय पर स्कूल में उपस्थित होकर पठन-पाठन में शामिल होना चाहिए। शासकीय शिक्षक संगठन ने ग्रामीण शिक्षकों के लिए आवास, सुरक्षित आवागमन और विशेष ग्रामीण भत्ता जैसी सुविधाओं की मांग की है। आयुक्त ने ऐप में अवकाश विकल्प न होने जैसी तकनीकी दिक्कतों के समाधान के लिए शिक्षक संघ से टीम बनाने को कहा है।