प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने मध्य प्रदेश संवर्ग की 1993 बैच की आईएएस अधिकारी दीप्ति गौड़ मुखर्जी को उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया है। वह पहले कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में सचिव थीं। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने 23 जुलाई के आदेश में संशोधन कर उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी, जिसका आदेश 10 अगस्त को जारी हुआ। उनकी नियुक्ति विनीत जोशी के स्थान पर हुई है। इसके अतिरिक्त, मध्य प्रदेश संवर्ग की 1994 बैच की आईएएस अधिकारी पल्लवी जैन गोविल को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय का सचिव बनाया गया है। 1992 बैच के आईएएस अधिकारी वीएल कांताराव को गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग में ओएसडी नियुक्त किया गया है।
कांग्रेस की लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को भाजपा पर निशाना साधा, जब पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संसद में उनका स्वागत किया गया। प्रियंका ने इसे शर्मनाक बताते हुए सत्तारूढ़ गठबंधन पर सवाल उठाए कि ऐसे मंत्री का स्वागत कैसे किया जा सकता है। उन्होंने भाजपा और एनडीए सांसदों की कड़ी आलोचना की। गांधी ने सरकार पर छात्रों को परेशान करने और दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ इंस्टाग्राम हैंडलों पर लड़कियों की तस्वीरें पोस्ट की गई हैं। उन्होंने सरकार से बातचीत के माध्यम से समस्या का समाधान करने या छात्रों को परेशान न करने का आग्रह किया।
अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस के इस्तीफे पर सवाल उठाया। उन्होंने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके का एक वीडियो साझा किया, जिन्होंने सरकार के खिलाफ न झुकने पर इस्तीफे की बात कही थी। बैंस से पंजाब में फार्मेसी भर्ती परीक्षा में कथित धांधली और पिछले पेपर लीक मामलों को लेकर इस्तीफे की मांग की जा रही है। बैंस ने कहा कि यदि उनके पद छोड़ने से शिक्षा व्यवस्था बेहतर होती है तो वह तुरंत इस्तीफा देने को तैयार हैं। रणवीर शौरी और तारा देशपांडे जैसे अन्य सेलेब्स ने भी प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी।
इंदौर में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पेपर लीक प्रकरण को लेकर भंवरकुआं चौराहे पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी है। इसमें छात्र, शिक्षक, अभिभावक और आम नागरिक शामिल हैं। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। दिल्ली में अनशन पर बैठे पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का भी विरोध किया गया। आंदोलन के नेताओं ने इसे गैर-राजनीतिक और संवैधानिक बताया, जिसका उद्देश्य लाखों छात्रों का भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।