भोपाल के लालघाटी स्थित प्रसिद्ध गुफा मंदिर सावन सोमवार के लिए पूरी तरह तैयार है। प्राकृतिक कंदरा में विराजमान स्वयंभू शिवलिंग का यह पावन धाम मध्य भारत के भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है। मंदिर के पंडित लेखराज शर्मा के अनुसार, महंत नारायणदास त्यागी महाराज ने 1949 में इस गुप्त कंदरा की खोज की थी और 1965 में इसका पुनर्निर्माण कर जन-साधारण के लिए खोला गया। सावन सोमवार पर अलसुबह विशेष जलाभिषेक, श्रृंगार, आरती और महामृत्युंजय जाप के बाद मंदिर के कपाट खुलेंगे। शाम को भी विशेष अभिषेक और महाआरती होगी। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए दर्शन, सुरक्षा, पेयजल और महाप्रसाद के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
जबलपुर में 10 अगस्त को 35 किलोमीटर की ‘संस्कार कांवड़ यात्रा’ आयोजित की जाएगी, जिसका उद्देश्य भगवान शिव का जलाभिषेक और प्रकृति संरक्षण का संदेश देना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इसमें शामिल होंगे। यात्रा ग्वारीघाट से शुरू होकर मटामर स्थित कैलाश धाम पहुंचेगी, जहां अखिलेश्वर महादेव का अभिषेक किया जाएगा और देववृक्ष स्थापित कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि यह यात्रा प्राचीन कांवड़ परंपरा को पर्यावरण चेतना से जोड़ती है, जिसमें नर्मदा जल के साथ देववृक्षों को शामिल किया गया है। महायोगी दादागुरु के सानिध्य में यह आयोजन सामाजिक और पर्यावरणीय चेतना का संदेश देगा।
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के परंपरानुसार भस्म आरती संपन्न हुई। सुबह 4 बजे पट खुलने के बाद पंडे-पुजारियों ने देवी-देवताओं का पूजन किया। भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक कर उन्हें रजत ॐ, बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष की माला सहित आकर्षक श्रृंगार से सजाया गया। फल और मिष्ठान का भोग लगाने के बाद कपूर आरती हुई और महा निर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म अर्पित की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।
श्रावण के पहले सोमवार को उज्जैन में बाबा महाकाल और ओंकारेश्वर में भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर की भव्य सवारी निकलेगी। लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, जिसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यापक इंतजाम किए हैं। महाकाल की सवारी की थीम ‘वैदिक उद्घोष’ होगी, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार गूंजेंगे। वहीं, ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में दिव्य नौका विहार आकर्षण का केंद्र रहेगा। दोनों तीर्थ स्थल धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों से शिवमय वातावरण में डूबे रहेंगे।
उज्जैन में सावन माह के पहले सोमवार को बाबा महाकाल की पहली सवारी धूमधाम से निकली। भगवान महाकाल ने चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर रूप में भक्तों को दर्शन दिए। पालकी के पीछे हाथी पर भगवान मनमहेश की प्रतिमा विराजित थी। मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस बार हर सवारी में अलग-अलग थीम होंगी और कावड़ यात्रियों के लिए नि:शुल्क भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई है। इस साल सावन में 4 और भादौ में 2 सवारियां निकाली जाएंगी, जिनमें विभिन्न दल और व्यवस्थाएं शामिल होंगी।
श्रावण मास के पहले सोमवार को उज्जैन में भगवान महाकाल की पहली सवारी निकलेगी। अवंतिकानाथ भगवान महाकाल मनमहेश स्वरूप में रजत पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। यह सवारी शाम 4 बजे महाकाल मंदिर से परंपरागत राजवैभव के साथ रवाना होगी। लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ेंगे, और शहर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठेगा। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह पालकी को विदा करेंगे, और सशस्त्र बल गार्ड ऑफ ऑनर देंगे। सुरक्षा के लिए 1200 पुलिसकर्मी, 500 से अधिक स्वयंसेवक, 5 ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे तैनात रहेंगे।
सावन माह की शुरुआत के साथ कांवड़ यात्रा प्रारंभ हो गई है, जिसमें लाखों केसरिया वस्त्रधारी कांवड़िए गंगा नदी का पवित्र जल लेकर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों और मंदिरों में जलाभिषेक करेंगे। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड सरकारों ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। इस यात्रा का इतिहास पौराणिक काल के समुद्र मंथन से जुड़ा है, जहां भगवान शिव ने हलाहल विष पीकर सृष्टि की रक्षा की थी। रावण, परशुराम और भगवान राम से जुड़ी मान्यताएं भी इस यात्रा के महत्व को दर्शाती हैं, जिसमें विभिन्न जल संग्रहण केंद्रों और प्रमुख मार्गों से भक्त शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं।
भोपाल में श्रावण-भादौ मास के दौरान बाबा मुक्तेश्वर की पांच सवारियां निकाली जाएंगी, जो उज्जैन के महाकाल की सवारियों के समान होंगी। श्रावण मास 30 जुलाई से शुरू होगा और पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा। इन पांच सवारियों में से चार श्रावण मास में तथा एक भादौ मास के सोमवार को निकलेगी। इस अवधि में प्रतिदिन मुक्तेश्वर महादेव की भस्म आरती भी की जाएगी। उज्जैन में महाकाल की 6 सवारियां निकलती हैं, जबकि भोपाल के मंदिरों में श्रावण की तैयारियां जोरों पर हैं।