मध्य प्रदेश शासन के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ चुनावी हलफनामे में संपत्ति छिपाने के आरोप में दायर याचिका पर जबलपुर हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। कांग्रेस नेता राजकुमार धनोरा द्वारा दायर इस याचिका में आरोप है कि राजपूत ने चुनाव के दौरान करोड़ों की संपत्ति की जानकारी छिपाई थी, जिसके आधार पर चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन को चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। पूर्व में भी इसी तरह के आरोपों पर कांग्रेस प्रत्याशी नीरज शर्मा की याचिका खारिज हो चुकी है, जिसका प्रभाव मौजूदा याचिका पर पड़ने की संभावना है।
इंदौर में 91 वर्षीय गीता चौहान को 19 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अपने फ्लैट का कब्जा वापस मिल गया है। उनकी लकवाग्रस्त बेटे की देखभाल के लिए रखी गई केयरटेकर ज्योति पांजरे ने फर्जी विवाह प्रमाण-पत्र बनाकर फ्लैट पर अवैध कब्जा कर लिया था, जिसके बाद मां-बेटे को सालों तक किराए के मकान में भटकना पड़ा। वरिष्ठ नागरिक अधिनियम, 2007 के तहत न्यायालय ने गीता चौहान के पक्ष में फैसला सुनाया। यह घटना मध्य प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ बढ़ते अपराधों की चिंताजनक स्थिति को उजागर करती है, जो लगातार तीसरे वर्ष देश में शीर्ष पर है।
जबलपुर हाई कोर्ट ने वरिष्ठ राजनेता मेनका गांधी और उनकी बहन अंबिका शुक्ला की भोपाल की पुश्तैनी 522 एकड़ जमीन से संबंधित कानूनी लड़ाई को समाप्त कर दिया है। कोर्ट ने उनकी रिट अपील निरस्त करते हुए वीएम सिंह के नाम विवादित संपत्ति के नामांतरण का रास्ता साफ कर दिया। यह विवाद वर्ष 1975 में शुरू हुआ था और इसमें 1993 की समझौता डिक्री तथा 2005 का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय शामिल है। हाई कोर्ट ने पारिवारिक समझौते की शर्तों को महत्वपूर्ण मानते हुए पांच दशक पुराने इस मामले पर विराम लगाया।
ग्वालियर में हाई कोर्ट के आदेश पर सेवानिवृत्त सैनिक भारत सिंह गुर्जर को उनके मकान का कब्जा दिलाने पहुंची राजस्व अधिकारियों और पुलिस टीम पर हमला किया गया। सैनिक के बेटे हमीर सिंह और बहू सीमा ने टीम पर पथराव किया। उन्होंने गैस सिलेंडर का पाइप निकालकर खुद व बच्चों को मारने की धमकी भी दी। सैनिक को उनके ही मकान से बेदखल कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने कोर्ट का सहारा लिया। थाटीपुर थाना पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज किया है।
सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच प्रस्तावित समझौते पर ग्वालियर जिला न्यायालय में सुनवाई से पहले, स्वर्गीय पद्माराजे सिंधिया की पुत्री प्रतिमा देवी ने कैविएट दायर कर ननिहाल की संपत्ति पर दावा किया है। इस दावे ने ज्येष्ठाधिकार के नियम को फिर से प्रासंगिक बना दिया है और संपत्ति विवाद के आगे बढ़ने के आसार हैं। प्रतिमा देवी ने अपने पक्ष को सुने बिना कोई आदेश पारित न करने का अनुरोध किया है।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि तलाक के बाद पूर्व पत्नी को अपने पूर्व पति की संपत्ति या सेवा संबंधी लाभों पर दावा करने का अधिकार नहीं रहता। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने अमरी बाई अहिरवार की रिट अपील खारिज कर दी। यह मामला दिवंगत कर्मचारी रामचरण अहिरवार के सेवानिवृत्ति लाभ और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ा था। खंडपीठ ने कहा कि विधिवत तलाक के बाद अपीलकर्ता का पूर्व पति की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है, और बेटी ही अनुकंपा नियुक्ति की हकदार होगी।
ग्वालियर के सिंधिया परिवार की अरबों रुपये की विरासत के बंटवारे पर महा-समझौते की सुनवाई ग्वालियर जिला न्यायालय में 27 जुलाई तक टल गई है। सोमवार को अंतिम सहमति की उम्मीद थी, लेकिन बुआओं के दावों से जुड़े आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण सुनवाई आगे बढ़ा दी गई। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव का उद्देश्य आपसी सहमति से संपत्ति विवाद को समाप्त करना है, जिसमें परिवार के कई सदस्य शामिल हैं। यदि समझौता मंजूर होता है, तो कई लंबित मुकदमे समाप्त हो जाएंगे।
ईओडब्ल्यू ने एक बिल्डर, उसके बेटे और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी के प्रयास का मामला दर्ज किया है। आरोपियों ने फैजान किदवई से ऐसे फ्लैट की रजिस्ट्री का अनुबंध किया जो पहले ही किसी और को बेचा जा चुका था और जिस पर आपराधिक प्रकरण भी दर्ज था। फैजान ने 2013 में अपना फ्लैट अनवर बेग को दिया था, जिसके बदले में उसे निर्माणाधीन फ्लैट मिलना था, जो कभी नहीं मिला। बाद में कई समझौतों और बाउंस हुए चेक के बाद, 2025 में उसे पहले से बिक चुके फ्लैट का अनुबंध कराया गया, तथ्यों को छिपाकर। ईओडब्ल्यू मामले की जांच कर रही है।
मध्य प्रदेश विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित कर दिया है, जिससे यह ऐसा करने वाला चौथा भाजपा शासित राज्य बन गया है। इस विधेयक को अब राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। कानून बहुविवाह, ट्रिपल तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप पर रोक के साथ-साथ विवाह पंजीयन, नौकरी और संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण नियम स्थापित करता है। 23 सितंबर 2008 के बाद की शादियों का एक साल के भीतर अनिवार्य पंजीयन कराना होगा, अन्यथा 25,000 रुपये का जुर्माना लग सकता है। नौकरी के लिए यूसीसी विवाह प्रमाण-पत्र अनिवार्य होगा, और संपत्ति विवाद में अदालत ‘रक्षक’ नियुक्त कर सकेगी।