मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को वन्यजीव संरक्षण, विशेषकर मानव-हाथी संघर्ष के मामलों के लिए सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विस्तृत गाइडलाइन तैयार करने का निर्देश दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने राज्य के आग्रह पर इसके लिए चार माह का समय दिया। अगली सुनवाई छह माह बाद होगी। यह निर्देश रायपुर निवासी नितिन सिंघवी की याचिका पर आया, जिसमें छत्तीसगढ़ से आने वाले जंगली हाथियों द्वारा फसल नष्ट करने, मकानों को नुकसान पहुंचाने और जनहानि का आरोप लगाया गया था।
इंदौर का कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय बाघों की संख्या में देश में दूसरे स्थान पर है और छोटे चिड़ियाघरों में समग्र पशु विविधता तथा प्रजनन में पहले स्थान पर है। पिछले दशक में 26 बाघ शावकों का जन्म हुआ, जिनमें से 22 स्वस्थ बड़े हुए। वर्तमान में चिड़ियाघर में 13 बाघ, 15 शेर और 3 तेंदुए हैं, जिनकी कुल संख्या 31 है। जू प्रभारी डॉ. उत्तम यादव प्रजनन की सफलता का श्रेय तनावमुक्त वातावरण, सावधानीपूर्वक पैडिग्री जांच और पशु व्यवहार की वैज्ञानिक निगरानी को देते हैं। चिड़ियाघर के बाघों की मांग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है, जो देश भर से आगंतुकों को आकर्षित करते हैं।
मध्य प्रदेश ने बाघ संरक्षण में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिससे राज्य में बाघों की संख्या बढ़कर 785 हो गई है। पारंपरिक जंगल छोटे पड़ने लगे हैं और बाघ नए इलाकों में भी देखे जा रहे हैं। बाघों को ‘पुजारी’, ‘मिस्टर इंडिया’ और ‘मौसी मां’ जैसे अनोखे नाम दिए गए हैं, जो पर्यटकों के बीच उनकी पहचान बढ़ाते हैं। मां से बिछड़े शावकों को जंगल में दोबारा बसाने का ‘रिवाइल्ड’ मॉडल सफल रहा है, जिससे 20 से अधिक शावकों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है। दो नए टाइगर रिजर्व भी बनाए गए हैं और निगरानी बढ़ाई गई है।