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मंडीदीप सिविल अस्पताल में लैब टेक्नीशियन ने फिनाइल पिया, ढाई माह से वेतन न मिलने का आरोप

मंडीदीप सिविल अस्पताल में संविदाकर्मी लैब टेक्नीशियन लक्ष्मी नारायण ने ढाई माह से वेतन न मिलने का आरोप लगाते हुए फिनाइल का सेवन कर लिया। सोशल मीडिया पर धमकी देने के बाद हुई इस घटना से अस्पताल में हड़कंप मच गया। उसे गंभीर अवस्था में भोपाल रेफर किया गया, जहां उपचार के बाद उसे छुट्टी दे दी गई और वह अब स्वस्थ है। बीएमओ डॉ. राजीव गौर ने इस आचरण को नियम विरुद्ध बताया और विकासखंड लेखाधिकारी अनिल राजपूत को लापरवाही के लिए नोटिस जारी किया गया है। कर्मचारी पर विभाग को बदनाम करने के आरोप भी लग रहे हैं।

संविदा महिला कर्मी को बाल देखभाल छुट्टी नहीं देने पर राज्य शिक्षा केंद्र निदेशक पर 50 हजार का जुर्माना

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने संविदा महिला कर्मचारी को बाल देखभाल छुट्टी (CCL) से वंचित करने पर राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह पर 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने छुट्टी का आवेदन खारिज करने वाले विभागीय आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा अवकाश नियम, 1977 के तहत संविदा महिला कर्मचारी भी दो बच्चों की देखभाल के लिए 240 दिन की छुट्टी की हकदार हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि विभागीय परिपत्र न्यायिक आदेशों से ऊपर नहीं हो सकते। याचिकाकर्ता आयशा शेख नौवीं बार कोर्ट पहुंची थीं।

संविदा कर्मचारी महासंघ ने की ऊर्जा विभाग की तर्ज पर सभी विभागों में नियमितीकरण नीति लागू करने की मांग

संविदा कर्मचारी-अधिकारी महासंघ ने राज्य सरकार से ऊर्जा विभाग की तर्ज पर सभी विभागों में संविदाकर्मियों के नियमितीकरण की नीति लागू करने की मांग की है। ऊर्जा विभाग में लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मचारियों को विभागीय पात्रता परीक्षा के माध्यम से नियमित करने की योजना है, जिसमें लगभग 6,000 पद आरक्षित किए गए हैं। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने इस संबंध में राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की है कि परीक्षा में अनुभव के लिए अंक और वर्गवार उत्तीर्ण अंकों की व्यवस्था अन्य विभागों में भी लागू की जाए।

मध्य प्रदेश के 1.83 लाख संविदा कर्मचारियों ने समान वेतन की मांग की

मध्यप्रदेश में लगभग 1.83 लाख संविदा, स्थाई और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान कार्य करने के बावजूद समान वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। कर्मचारी संगठनों ने सरकार से समान कार्य के लिए समान वेतन और चरणबद्ध नियमितीकरण की नीति लागू करने की मांग की है। नियमित कर्मचारियों को महंगाई भत्ता, वार्षिक वेतनवृद्धि और पदोन्नति सहित कई लाभ मिलते हैं, जबकि संविदा कर्मचारियों का वेतन 8 हजार से 30 हजार रुपये तक सीमित है और उन्हें नौकरी की सुरक्षा भी नहीं मिलती। विशेषज्ञों ने संविदा नियुक्तियों के बढ़ते दायरे पर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट नीति की आवश्यकता जताई है।

विद्युत कंपनियों में 50% रिक्त नियमित पद संविदाकर्मियों से भरे जाएंगे

मध्य प्रदेश सरकार ने विद्युत वितरण, पावर ट्रांसमिशन और पावर मैनेजमेंट कंपनियों में कार्यरत लगभग छह हजार संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का निर्णय लिया है। रिक्त नियमित पदों के 50 प्रतिशत संविदाकर्मियों से भरे जाएंगे। पात्र कर्मचारियों को अक्टूबर से पहले 100 अंकों की ऑनलाइन विभागीय परीक्षा देनी होगी। अनुसूचित जाति-जनजाति और ओबीसी वर्ग को 40%, जबकि अनारक्षित वर्ग को 50% अंक प्राप्त करने होंगे। अनुभव के लिए अधिकतम 30 बोनस अंक दिए जाएंगे। मध्य प्रदेश संविदा कर्मचारी महासंघ ने ऐसी ही व्यवस्था अन्य विभागों में भी लागू करने की मांग की है।