मध्यप्रदेश में लगभग 1.83 लाख संविदा, स्थाई और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान कार्य करने के बावजूद समान वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। कर्मचारी संगठनों ने सरकार से समान कार्य के लिए समान वेतन और चरणबद्ध नियमितीकरण की नीति लागू करने की मांग की है। नियमित कर्मचारियों को महंगाई भत्ता, वार्षिक वेतनवृद्धि और पदोन्नति सहित कई लाभ मिलते हैं, जबकि संविदा कर्मचारियों का वेतन 8 हजार से 30 हजार रुपये तक सीमित है और उन्हें नौकरी की सुरक्षा भी नहीं मिलती। विशेषज्ञों ने संविदा नियुक्तियों के बढ़ते दायरे पर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट नीति की आवश्यकता जताई है।
मध्य प्रदेश सरकार ने विद्युत वितरण, पावर ट्रांसमिशन और पावर मैनेजमेंट कंपनियों में कार्यरत लगभग छह हजार संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का निर्णय लिया है। रिक्त नियमित पदों के 50 प्रतिशत संविदाकर्मियों से भरे जाएंगे। पात्र कर्मचारियों को अक्टूबर से पहले 100 अंकों की ऑनलाइन विभागीय परीक्षा देनी होगी। अनुसूचित जाति-जनजाति और ओबीसी वर्ग को 40%, जबकि अनारक्षित वर्ग को 50% अंक प्राप्त करने होंगे। अनुभव के लिए अधिकतम 30 बोनस अंक दिए जाएंगे। मध्य प्रदेश संविदा कर्मचारी महासंघ ने ऐसी ही व्यवस्था अन्य विभागों में भी लागू करने की मांग की है।