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पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने जंतर मंतर प्रदर्शनों में हिंसा पर उठाए सवाल, झारखंड आंदोलन का दिया उदाहरण

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने गुजरात के सूरत में जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शनों पर बयान दिया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन को नागरिक अधिकार बताया। हालांकि, उन्होंने प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर सवाल उठाए। विक्रम सिंह ने झारखंड के युवाओं के आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां गरिमा और मर्यादा के साथ शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जंतर-मंतर पर भी ऐसा ही शांतिपूर्ण विरोध होता, तो स्थिति अलग होती।

लेखक अमीश त्रिपाठी: विरोध प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में हों

प्रसिद्ध लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा है कि जेन-जी को विरोध प्रदर्शन का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन यह हमेशा संविधान की सीमाओं के भीतर होना चाहिए। पुणे में अपनी नई बाल पुस्तक ‘ध्रुव-तारा: द ग्रेट इंडियन हिस्ट्री क्विज’ के प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी ने आंदोलन किए हैं, इसलिए केवल जेन-जी को दोष देना उचित नहीं है। अमीश ने डॉ. आंबेडकर के ‘ग्रामर ऑफ अनार्की’ का जिक्र करते हुए संविधान की सर्वोच्चता पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय इतिहास पढ़ाने के तरीके में बदलाव और औपनिवेशिक सोच को हटाने की भी बात कही, जिसका उनकी नई पुस्तक के माध्यम से प्रयास किया गया है।

एमपी हाईकोर्ट में 27% ओबीसी आरक्षण पर लंबी सुनवाई, ऋग्वेद से इंदिरा साहनी तक के दृष्टांतों पर बहस

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक और न्यायमूर्ति विनय सराफ की विशेष युगलपीठ के समक्ष 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़ी याचिकाओं पर लंबी सुनवाई हुई। बहस में भारतीय समाज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, मनुस्मृति, संविधान की मूल भावना और इंदिरा साहनी के न्यायदृष्टांत पर विस्तृत संवैधानिक तर्क रखे गए। ओबीसी पक्ष के अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह ने आरक्षण को शासन-प्रशासन में समान भागीदारी का संवैधानिक माध्यम बताया और इंदिरा साहनी फैसले में निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा पर भी सवाल उठाए। अगली सुनवाई 30 जुलाई को निर्धारित की गई है।

सुप्रीम कोर्ट फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की रिलीज को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई को सहमत, सिब्बल की जनहित याचिका पर केंद्र को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ओडिशा सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की रिलीज को चुनौती दी गई थी। फिल्म को सीबीएफसी से मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन ओडिशा सरकार ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई थी। एक अन्य मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल की जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। यह याचिका संविधान की दसवीं अनुसूची की उस व्याख्या को चुनौती देती है जो विधायकों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य होने से बचने के लिए पार्टी विलय का रास्ता अपनाने की अनुमति देती है।