केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ पेश किया है, जिसमें केरल का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष के हंगामे के बीच यह बिल प्रस्तुत किया। केरल विधानसभा ने लगभग दो साल पहले नाम बदलने के पक्ष में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था, जिसे राज्य सरकार ने जून 2024 में केंद्र सरकार को भेजा था। राष्ट्रपति द्वारा राय जानने के लिए विधेयक विधानसभा को भेजे जाने के बाद, उसने सर्वसम्मति से नाम बदलने के प्रस्ताव का समर्थन किया।
सरकार ने परिसीमन के लिए आवश्यक आंकड़े जुटा लिए हैं और अब उसका ध्यान संसद में गतिरोध समाप्त करने पर है ताकि संविधान संशोधन विधेयक के रूप में परिसीमन प्रस्ताव पेश किया जा सके। गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष और अन्य मंत्रियों के साथ बैठक कर गतिरोध खत्म करने के विकल्पों पर चर्चा की। सरकार डीएमके और एनसीपी के शरद पवार गुट सहित विभिन्न दलों से समर्थन जुटाने का प्रयास कर रही है। विधेयक पारित करने के लिए 360 सांसदों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है, जबकि सरकार को अभी चार सांसदों की कमी है। विपक्ष ने अपनी मांगों का दायरा बढ़ा दिया है, जिससे संसद सत्र की अंतिम तीन बैठकें महत्वपूर्ण हो गई हैं।
संसद में विपक्षी दलों के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही को दिन में दूसरी बार दोपहर तीन बजे तक स्थगित कर दिया गया। इस दौरान एफसीआरए विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक को अल्पसंख्यक विरोधी होने से इनकार किया, जबकि कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इसे वापस लेने की मांग की। लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक पेश किया गया और दो अन्य विधेयक बिना चर्चा के पारित हुए। राज्यसभा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा जारी रही।
विपक्षी दलों ने संसद के मानसून सत्र के लिए अपनी रणनीति तेज कर दी है। दोनों सदनों के विपक्षी फ्लोर लीडर्स राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के चैंबर में बैठक करेंगे, जिसका उद्देश्य सत्र के शेष दिनों के लिए सदन के भीतर और बाहर की रणनीति तैयार करना है। बैठक के तुरंत बाद, विपक्षी सांसद संसद भवन के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। विपक्ष 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चंदा घोटाला विवाद जैसे मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है। लोकसभा में आज कई विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे, जबकि सरकार 12 अगस्त को FCRA संशोधन विधेयक पर चर्चा करा सकती है।
संसद के मानसून सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘मूर्ख’ और ‘अंधभक्त’ संबंधी बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने राहुल गांधी से इस मामले पर माफी मांगने की मांग की है, जबकि राहुल गांधी ने माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की आपत्ति और सत्ता पक्ष के हंगामे के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी द्वारा उपयोग किए गए ‘इडियट’ शब्द को संसद की आधिकारिक कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया।
संसद के मानसून सत्र में विपक्षी दल दिल्ली में छात्रों पर बल प्रयोग के मामले में सरकार को घेरेंगे और गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा मांगेंगे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शाह को पत्र लिखकर छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल पर जवाबदेही की मांग की है। वहीं, सरकार विपक्ष पर पलटवार करने की तैयारी में है और सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल व पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाने वाला सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 संसद में पेश करेगी। इस विधेयक में संगठित और गैर-संगठित अपराधों के लिए कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) संसदीय दल की ‘मंगल मिलन’ बैठक मंगलवार को संसद पुस्तकालय भवन में शुरू हुई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों के साथ तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए एनसीपीआई सांसद काकोली घोष, शताब्दी रॉय और सायोनी घोष पहली बार शामिल हुए। बैठक में नकल विरोधी विधेयक को आगे बढ़ाने और जंतर-मंतर पर कथित पुलिस ज्यादती के मुद्दे पर चर्चा हुई। विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना है, जिसमें 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने जैसे सख्त प्रावधान हैं।
एनसीपी (एससी) प्रमुख शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले ने संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात को मौजूदा राजनीतिक हालात और छात्रों के मुद्दों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। इससे पहले, पवार और सुले नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने छात्रों का समर्थन किया और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को भी समर्थन दिया। पवार ने केंद्र से छात्रों की मांगों को संवेदनशीलता से सुनने की अपील की। वहीं, सुप्रिया सुले ने एनसीपी (एससीपी) के एनडीए में शामिल होने की अटकलों का खंडन किया।