मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक विपक्ष के भारी हंगामे और कांग्रेस के विरोध के बीच बहुमत से पारित हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में विधेयक पर वक्तव्य देते हुए विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया और कहा कि 93% नागरिकों ने यूसीसी का समर्थन किया है। इस विधेयक के तहत सभी विवाहों का सरकारी पंजीयन अनिवार्य होगा और बहुविवाह पर प्रतिबंध लगेगा। मध्य प्रदेश उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाने वाला देश का चौथा प्रमुख राज्य बन गया है।
मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच मोहन यादव सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित कराया। यूसीसी लागू होने के बाद विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, उत्तराधिकार और महिलाओं-बच्चों के अधिकारों से जुड़े नए प्रावधान लागू होंगे। इसमें बेटे-बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार मिलेंगे, और लिव-इन संबंधों के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिसका उल्लंघन करने पर जुर्माना या जेल हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधेयक को महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता का कानून बताया और दावा किया कि 93% नागरिकों ने इसका समर्थन किया है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने विधानसभा में प्रस्तुत समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक का विरोध किया। उन्होंने इसे राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया और आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बेरोजगारी, किसानों की बदहाली, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए यूसीसी का मुद्दा उठा रही है। पटवारी ने जोर दिया कि सरकार की प्राथमिकता जनता के मुद्दे होने चाहिए। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का भी विरोध किया और प्रदेश सरकार से बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था तथा निवेशक सम्मेलनों पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।