मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राज्य विधानसभा से पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पर राष्ट्रपति की अनुमति से पहले कानूनी सलाह मांगी है। विधेयक को लोकभवन की विधि एवं विधायी शाखा भेजा गया है, क्योंकि इसके कई प्रविधान भारत सरकार के विभिन्न कानूनों से संबंधित हैं। इसमें बहुविवाह, निकाह हलाला पर रोक और विवाह-तलाक व लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रविधान हैं। विधेयक 21 जुलाई को विधानसभा में पारित हुआ था। राष्ट्रपति कार्यालय संवैधानिक और कानूनी प्रविधानों का परीक्षण करेगा। उत्तराखंड में यूसीसी लागू हो चुका है, जबकि गुजरात और असम में प्रक्रिया जारी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर में 435 करोड़ रुपये के विकास प्रोजेक्टों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि नगर निगम जबलपुर को अगले एक वर्ष के भीतर ‘मेट्रोपोलिटन सिटी’ बनाया जाएगा, जिसके लिए कमिश्नर और कलेक्टर को ड्राफ्ट प्रपोजल तैयार करने के निर्देश दिए गए। प्रमुख घोषणाओं में नया चिड़ियाघर, ‘अमृत 1.0’ सीवेज परियोजना के तहत तीन एसटीपी का लोकार्पण, पीएम स्वनिधि योजना के तहत डिजिटल क्रेडिट कार्ड वितरण, 11 लाख पौधों का ‘मियावाकी पद्धति’ से रोपण और सभी विधानसभाओं में सांदीपनि विद्यालय खोलना शामिल है।
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित होने के बाद उससे संबंधित एक जनहित याचिका जबलपुर हाई कोर्ट से वापस ले ली गई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने भोपाल नगर निगम के पूर्व पार्षद मेवा लाल की याचिका को निष्प्रभावी मानते हुए निरस्त कर दिया। याचिका में यूसीसी लागू करने से पहले राष्ट्रीय आयोगों से परामर्श न करने और आदिवासी अधिकारों व लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीयन पर आपत्ति जताई गई थी। कोर्ट ने कहा कि भविष्य में यूसीसी कानून की संवैधानिक वैधता को नई याचिका से चुनौती दी जा सकती है।
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद ‘लव जिहाद’ के मामलों में कमी आने की उम्मीद है। लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है और बल या कपट से सहमति प्राप्त करने पर पांच साल की सजा का प्रावधान है। यह कदम 2021 के धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की कम प्रभावशीलता के बाद उठाया गया है, जिसके तहत संगठित गिरोहों के खुलासे भी हुए थे।
अधिवक्ता शीराज कुरैशी की पुस्तक ‘इन सपोर्ट ऑफ यूसीसी-एमपी’ समान नागरिक संहिता विधेयक के विधानसभा में पेश होने के बाद चर्चा में है। कुरैशी का दावा है कि यह पुस्तक संविधान की मूल भावना और अनुच्छेद 44 के आलोक में यूसीसी की आवश्यकता और कानूनी पहलुओं को स्पष्ट करती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठनों के पदाधिकारी कुरैशी ने 2006 से इस विषय पर अध्ययन किया है। पुस्तक में मुस्लिम समाज में यूसीसी को लेकर प्रचलित भ्रांतियों पर चर्चा की गई है, और यह न्याय तथा समानता की अवधारणा को मजबूत करती है। इसका अंग्रेजी संस्करण प्रकाशित हो चुका है।
मध्य प्रदेश विधानसभा ने मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) समेत 8 विधेयक पारित किए, जिससे मध्य प्रदेश यूसीसी पारित करने वाला चौथा भाजपा शासित राज्य बन गया है। इस विधेयक के तहत सितंबर 2008 के बाद हुए सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिसे यूसीसी लागू होने के एक वर्ष के भीतर कराना होगा। यह कानून राज्य के बाहर रहने वाले मध्य प्रदेश के निवासियों पर भी लागू होगा। सरकारी या निजी नौकरी में वैवाहिक स्थिति बदलने के लिए विवाह पंजीकरण प्रमाण-पत्र अनिवार्य होगा। संपत्ति विवादों में अदालत रक्षक नियुक्त कर सकेगी। सदन में यूसीसी पर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक विपक्ष के भारी हंगामे और कांग्रेस के विरोध के बीच बहुमत से पारित हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में विधेयक पर वक्तव्य देते हुए विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया और कहा कि 93% नागरिकों ने यूसीसी का समर्थन किया है। इस विधेयक के तहत सभी विवाहों का सरकारी पंजीयन अनिवार्य होगा और बहुविवाह पर प्रतिबंध लगेगा। मध्य प्रदेश उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाने वाला देश का चौथा प्रमुख राज्य बन गया है।
मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच मोहन यादव सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित कराया। यूसीसी लागू होने के बाद विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, उत्तराधिकार और महिलाओं-बच्चों के अधिकारों से जुड़े नए प्रावधान लागू होंगे। इसमें बेटे-बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार मिलेंगे, और लिव-इन संबंधों के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिसका उल्लंघन करने पर जुर्माना या जेल हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधेयक को महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता का कानून बताया और दावा किया कि 93% नागरिकों ने इसका समर्थन किया है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने विधानसभा में प्रस्तुत समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक का विरोध किया। उन्होंने इसे राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया और आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बेरोजगारी, किसानों की बदहाली, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए यूसीसी का मुद्दा उठा रही है। पटवारी ने जोर दिया कि सरकार की प्राथमिकता जनता के मुद्दे होने चाहिए। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का भी विरोध किया और प्रदेश सरकार से बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था तथा निवेशक सम्मेलनों पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।