भोपाल का राजस्व विभाग नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे जैसे मामलों के निराकरण में प्रदेश के सबसे खराब पांच जिलों में शामिल है। सीमांकन में राजधानी पूरे राज्य में सबसे निचले पायदान पर है, जिससे सैकड़ों मामले महीनों से लंबित हैं। तहसीलदार की गैरमौजूदगी और रिकॉर्ड में गड़बड़ी प्रमुख कारण हैं। सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों में भी राजस्व विभाग 30,403 लंबित मामलों के साथ पहले नंबर पर है। भोपाल कलेक्टर प्रियांक मिश्रा ने लंबित मामलों में कमी आने और आगे भी सुधार का आश्वासन दिया है।
भोपाल नगर निगम में इंजीनियरों की पदस्थापना को लेकर अजीब स्थिति सामने आई है। एक ओर 13 पदोन्नत सहायक यंत्री बिना काम बैठे हैं, जिनमें से छह को तीन महीने से कोई जिम्मेदारी नहीं मिली है। दूसरी ओर, निगम के कई जोन और महत्वपूर्ण शाखाएं इंजीनियरों की कमी से जूझ रही हैं, और 48 उपयंत्री सहायक यंत्री का प्रभार संभाल रहे हैं। निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने बताया कि पदस्थापना प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।
मध्य प्रदेश में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) को वर्ष 2020 से जून 2026 तक साढ़े छह साल की अवधि में रिकॉर्ड 23,261 शिकायतें मिलीं, लेकिन अदालतों में केवल 8 मामलों में ही चालान पेश किए गए। विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई। इन शिकायतों में से 3,018 को प्रारंभिक जांच के लिए स्वीकार किया गया, जबकि 756 आवेदनों को जांच के बाद बंद कर दिया गया। यह आंकड़ा EOW की कार्यप्रणाली और मामलों के निपटारे की धीमी गति पर सवाल उठाता है।