मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की पांच जजों की वृहद पीठ ने सरकारी ठेकों और ब्लैकलिस्टिंग पर ऐतिहासिक निर्णय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करना उसकी व्यावसायिक मृत्यु के समान है, और इससे होने वाली गैर-मौद्रिक क्षति का आकलन नहीं हो सकता। ऐसे मामले मध्य प्रदेश मध्यस्थम अधिकरण अधिनियम, 1983 के क्षेत्राधिकार से बाहर हैं, और प्रभावित ठेकेदार सीधे हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकते हैं। यह निर्णय मेसर्स नितिन एंटरप्राइजेज के मामले में आया, जिन्हें नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने ब्लैकलिस्ट किया था।
इंदौर में बिजली कंपनी के एक सब इंजीनियर के खिलाफ लोकायुक्त ने कार्रवाई की है। प्रारंभिक जांच में उनके बेटे, बहू और रिश्तेदारों के नाम पर ट्रांसफार्मर निर्माण की कई इकाइयां मिली हैं। आरोप है कि प्रभाव का इस्तेमाल कर इन फर्मों को बिजली कंपनी के ठेके दिलवाए जाते थे। लोकायुक्त अब इन फर्मों की हिस्सेदारी और सरकारी ठेकों से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही है। मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 के पहले छह माह में लोकायुक्त ने 33 ट्रैप और भ्रष्टाचार के प्रकरण दर्ज किए हैं, जिसमें राजस्व विभाग सबसे आगे है।