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झाबुआ से जुड़ा 2934 करोड़ के कथित साइबर फर्जीवाड़े का नेटवर्क, पेटलावद निवासी सह-आरोपी गिरफ्तार

झाबुआ के पेटलावद क्षेत्र से जुड़े 2934 करोड़ रुपये के कथित साइबर फर्जीवाड़े के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने पेटलावद के रूपगढ़ निवासी सह-आरोपी विनोद कुमार राठौर को 22 अगस्त को गिरफ्तार किया। यह फर्जीवाड़ा शेयर बाजार में निवेश और ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर किया जा रहा था। मुख्य आरोपी अनुराग अरविंद श्रीवास्तव को 31 जुलाई 2026 को नागपुर से पकड़ा गया था। इस गिरोह ने फर्जी स्क्रीनशॉट और ‘एसीआई सेंचुरी’ ऐप का उपयोग कर निवेशकों को धोखा दिया। जांच में दो करोड़ रुपये फ्रीज किए गए हैं और 3087 ऑनलाइन शिकायतें सामने आई हैं।

जबलपुर में चार लोगों से 5.65 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी

जबलपुर में ऑनलाइन ठगी के चार अलग-अलग मामलों में अज्ञात ठगों ने चार लोगों के खातों से कुल 5 लाख 65 हजार 888 रुपये निकाल लिए हैं। पीड़ितों में विक्टोरिया जिला अस्पताल के नेत्र सहायक चिकित्सक, एक निजी कंपनी के कर्मचारी और 82 वर्षीय बुजुर्ग शामिल हैं। गोरखपुर, गढ़ा और गुप्तेश्वर थानों में इन मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। ठगों ने मोबाइल सुधारने, फर्जी ऐप डाउनलोड करवाने और सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाने के झांसे में फंसाकर इन वारदातों को अंजाम दिया।

रतलाम कलेक्टर के नाम और फोटो से फर्जी व्हाट्सएप संदेश

रतलाम में कलेक्टर अजय कटेसरिया के नाम और प्रोफाइल फोटो का दुरुपयोग कर फर्जी व्हाट्सएप नंबर 639615402077 से कई लोगों को संदेश भेजे गए। कलेक्टर ने पुष्टि की कि यह उनका अधिकृत नंबर नहीं है और मामले की सूचना पुलिस को दी है। उन्होंने नागरिकों और अधिकारियों से ऐसे संदेशों पर भरोसा न करने, पैसों की मांग पर प्रतिक्रिया न देने और बैंक या यूपीआई के माध्यम से भुगतान न करने की अपील की है। कलेक्टर ने साइबर अपराधियों से सतर्क रहने और संदिग्ध संदेशों की पुष्टि के बिना व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने की सलाह दी है।

साइबर ठगी की रकम निकालने वालों की पहचान पर हाई कोर्ट सख्त

जबलपुर हाई कोर्ट ने साइबर ठगी की रकम को म्यूल खातों से एटीएम द्वारा निकालने पर गंभीर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से बड़ी या संदिग्ध रकम की एटीएम निकासी पर अतिरिक्त प्रमाणीकरण व्यवस्था पर विचार करने को कहा है, जिसमें बायोमेट्रिक व चेहरा पहचानने जैसी तकनीकों का सुझाव दिया गया है। याचिका पर सुनवाई के दौरान पांच आरोपितों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई, जो अपने बैंक खाते किराये पर देते थे। जांच एजेंसी मुख्य आरोपित तक पहुंचने के करीब है।

ग्वालियर साइबर ठगी: मेरठ से 3 गिरफ्तार, फर्जी फर्म खाते में 7 राज्यों का पैसा

ग्वालियर में 1.63 करोड़ रुपये की निवेश ठगी के मामले में क्राइम ब्रांच ने मेरठ से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने अपनी फर्जी फर्म ‘जुबेर टेलीकॉम मेरठ’ का बैंक खाता साइबर ठगों को 5 हजार रुपये प्रतिदिन के किराए पर उपलब्ध कराया था। इस खाते में ग्वालियर की ठगी के 11 लाख रुपये सहित सात राज्यों में हुई साइबर ठगी का पैसा भी पहुंचा था। पुलिस ने इसे ‘म्यूल बैंक खाता’ माना है। जांच में बिलाल सैफी का ‘साधू’ नामक व्यक्ति से व्हाट्सएप संपर्क और दिल्ली में मुलाकात का खुलासा हुआ है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और कथित मास्टरमाइंड ‘साधू’ की तलाश कर रही है।

कुक्षी युवक से ‘दिल्ली क्राइम ब्रांच’ बताकर अश्लील वीडियो के नाम पर 93 हजार रुपये ऐंठे

कुक्षी के 26 वर्षीय युवक रितिक चोयल से ‘दिल्ली क्राइम ब्रांच’ का अधिकारी बताकर 93,499 रुपये की ठगी की गई। अज्ञात मोबाइल नंबर से वीडियो कॉल कर अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई, जिसके बाद युवक ने क्यूआर कोड के माध्यम से कई किस्तों में भुगतान किया। ठगी का पता चलने पर कुक्षी थाने में जीरो एफआईआर के आधार पर प्रकरण दर्ज किया गया है।

इंदौर: साइबर ठगी में 250 से अधिक बैंक खातों की जानकारी साझा करने वाला मुख्य आरोपी गिरफ्तार

इंदौर क्राइम ब्रांच ने ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स’ के तहत साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए बालेश्वर राठौर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि राठौर ने 250 से अधिक बैंक खातों की जानकारी अन्य आरोपियों को साझा की थी। इससे पहले, ललित उर्फ ऋषि सुतार नामक व्यक्ति से 21 बैंक पासबुक, 8 एटीएम कार्ड सहित कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए थे। पुलिस की जांच में इन खातों का संबंध निवेश धोखाधड़ी और एपीके फ्राड जैसे विभिन्न साइबर अपराधों से पाया गया है, जिनकी शिकायतें अलग-अलग राज्यों से जुड़ी हैं। मामले में आगे की जांच जारी है।

भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी बनी

राजधानी भोपाल के कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के नाम से फेसबुक पर एक फर्जी आईडी बनाने का मामला सामने आया है। जिला प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लेते हुए अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस फर्जी आईडी को फॉलो न करें और न ही इसके किसी संदेश का जवाब दें। ‘प्रियंक मिश्रा IAS’ नाम से बनाई गई इस प्रोफाइल में कलेक्टर, अपर कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ की तस्वीरें उपयोग की गई हैं। पुलिस और साइबर सेल अब इस नई फर्जी आईडी बनाने वाले का पता लगाने में जुट गई है।

ग्वालियर पुलिस ने साइबर ठगी गिरोह के 6 म्यूल अकाउंट एजेंटों को किया गिरफ्तार

ग्वालियर पुलिस ने ऑनलाइन सट्टे और साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े छह ‘म्युल अकाउंट’ एजेंटों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह देशभर के लोगों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करता था। गिरफ्तार आरोपी मुख्य सरगना उदय चौहान के लिए किराए के बैंक खातों का इंतजाम करते थे, जिनका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता था। पुलिस ने गिरवाई में पकड़े गए ऑनलाइन सट्टे के अड्डे की जांच के दौरान इन संदिग्ध खातों से जुड़ी कड़ियां पाईं। आरोपितों ने स्वीकार किया कि वे त्वरित मुनाफे के लिए साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध करा रहे थे। पुलिस वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही है।

ग्वालियर में वायुसेनाकर्मी सहित पांच लोग साइबर ठगी का शिकार, 2.26 लाख रुपये गंवाए

ग्वालियर शहर में साइबर ठगी की पांच घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें एक वायुसेनाकर्मी सहित पांच लोग शिकार हुए हैं। महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन में पदस्थ सुनील बंसल ने ‘वेलकम बोनस’ के झांसे में आकर एक लिंक पर क्लिक किया, जिसके बाद उनके खाते से 2.26 लाख रुपये निकल गए। अन्य घटनाओं में अरविंद श्रीवास ने 32,214 रुपये, देवकुमार गुप्ता ने लगभग 67 हजार रुपये, माताप्रसाद राठौर ने 1.18 लाख रुपये और अनवर कुरैशी ने 40 हजार रुपये गंवाए हैं। ये सभी घटनाएं शहर के महाराजपुरा और मुरार क्षेत्रों से संबंधित हैं।